अयोध्या। रामनगरी में मकर संक्रांति का पर्व दो दिन मनाया गया। वैष्णव नगरी में उदया तिथि की मान्यता है। जिसके चलते रविवार को भी स्नान-दान का सिलसिला जारी रहा। ब्रह्मा व गजकेेेसरी के दुर्लभ संयोग में भगवान सूर्य उत्तरायण हो गए। सरयू में स्नान के साथ ही कामनाओं का अर्घ्य देने की होड़ रही।
सूर्य ने शनिवार की रात 8: 34 बजे मकर राशि में प्रवेश किया। इसके बाद रविवार को ब्रह्ममुुहूर्त से सरयू में मकर संक्रांति का स्नान आरंभ हो गया। भोर में ही सरयू का तट संतों एवं भक्तों की भीड़ से पट गया। ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी नजर आई। हल्के कोहरे की चादर में लिपटे भगवान भास्कर के उदीयमान होते ही श्रद्धालुओं ने हर-हर महादेव, जय सरयू मैया, जय श्रीराम के जयघोष के साथ पुण्य की डुबकी लगाई।
बस्ती निवासी अजितेश पाठक सपरिवार स्नान को पहुंचे थे। शीतलहर व सिहरन के बीच उन्होंने सरयू पर दान-पुण्य किया। गोंडा निवासी संतोष तिवारी अपनी बूढ़ी मां को सहारा देकर सरयू में स्नान करा रहे थे। कहा कि वह हर साल मकर संक्रांति पर पुण्य की डुबकी लगाने अयोध्या पहुंचते हैं।
सरयू घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद खिचड़ी दान की परंपरा का निवर्हन भी किया। घाटों पर गोदान-वस्त्र दान, अन्न दान की होड़ रही। स्नान -दान के बाद श्रद्धालुओं का काफिला दर्शन के लिए मंदिरों की तरफ निकल पड़ा। नागेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक व दुग्धाभिषेक किया।
इसके बाद रामकोट में भीड़ उमड़ी। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में ब्रह्ममुहूर्त से ही शुरू हुआ दर्शन-पूूजन का सिलसिला शयन आरती तक जारी रहा। रामलला सहित कनकभवन में भी दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की कतार लगी रही। संक्रांति स्नान को लेकर शनिवार से ही रामनगरी में यातायात डायवर्जन लागू कर दिया गया था।
रामलला को लगा खिचड़ी का भोग
अयोध्या। रामजन्मभूमि के अस्थायी मंदिर में विराजमान श्रीरामलला सरकार को रविवार को खिचड़ी का भोग लगाया गया। श्रीरामजन्मभूमि के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि रामलला को सुबह विधिवत स्नान-श्रृंगार कर लाल वस्त्र धारण कराया गया। दोपहर 12 बजे खिचड़ी, दही, पापड़, घी, अचार, पूड़ी व सब्जी का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
दशरथ महल बड़ास्थान में महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य की अध्यक्षता में धनुषधारी भगवान को खिचड़ी का भोग लगाकर भक्तों केे प्रसाद वितरित किया गया। इसी तरह प्राचीन पीठ रंगमहल, कनकभवन, श्रीरामबल्लभाकुंज, उदासीन आश्रम सहित अन्य मंदिरों में भी विराजमान भगवान को खिचड़ी का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद बांटा गया। संवाद
जमकर हुई पतंगबाजी
अयोध्या। आसमान में इठलाती सतरंगी पतंगे, घरों से लेकर सरयू तट यह सिलसिला सुबह से लेकर दिन ढ़लने तक चलता रहा। एक-दूसरे की पतंग को काटने की होड़ मची रही। मौका था मकर संक्रांति का। इस पर्व पर युवा, बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं, सभी ने हाथ आजमाए। छतों और मैदानों पर सभी लोग डटे रहे। हवा में एक कटी नहीं कि दूसरी को छोड़इया देते लोग दिखे। कटी पतंग को लूटने वाले भी पीछे नहीं थे। पूरे दिन दुकानों पर पतंगों और मांझों की खरीदारी होती रही। संवाद