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कोरोना में अयोध्या के पुरोहितों को लगी लाखों की चपत

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अयोध्या। धार्मिक अनुष्ठान के लिए दूर-दूर तक विख्यात अयोध्या के तीर्थ पुरोहित, आचार्य, पंडित भी पिछले चार महीने से परेशान हैं। कोरोना के कारण अनुष्ठान बंद होने से रामनगरी के पंडे, पुुजारी और कर्मकांडी ब्राह्मणों की आजीविका प्रभावित हो रही है, उनका लाखों का नुकसान हुआ है। दक्षिणा पर आश्रित पुरोहितों के लिए अब आजीविका चलाना कठिन हो गया है।
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रामनवमी मेले के बाद अब कोरोना के चलते सावन मेला पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा दूर-दूर तक अनुष्ठान करने वाले पुरोहित, पंडित चार महीने से घर पर ही बैठे हैं। इस दौरान उन्हें लाखों का नुकसान हुआ है।
अयोध्या से ब्राह्मण, पुजारी और बटुक दूर-दूर तक विविध अनुष्ठान के लिए जाते थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस पर भी रोक लगी हुई है। ऐसे में दक्षिणा के सहारे आजीविका चलाने वालों के सामने संकट खड़ा हो गया है। अयोध्या से पूजा, पाठ, महायज्ञ और विवाह आदि के लिए आचार्य, शास्त्री,ब्राह्मण, अर्चक देश के अलग-अलग राज्यों में भी जाते हैं।
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मुंबई, दिल्ली, बिहार, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पंजाब आदि प्रांतों में अयोध्या के वेद पंडितों को बुलाया जाता है, लेकिन कोरोना के चलते बाहरी सारे अनुष्ठान आयोजन पिछले चार महीने से बंद चल रहे हैं। इस दौरान वेद पंडितों, आचार्यों, पुरोहितों की आजीविका भले ही प्रभावित रही है, लेकिन सभी आचार्य, पुरोहित कोरोना काल में अपने-अपने घरों, आश्रमों में अनुष्ठान में कोरोना के शमन की कामना से जरूर संलग्न रहे।
कोरोना ने प्रभावित की आय
तीर्थ पुरोहित वीरेंद्र शास्त्री कहते हैं कि आम दिनों में 20 से 25 हजार महीने की आय हो जाती थी, कोरोना के दौरान पूरी तरह से धार्मिक गतिविधियां बंद रहीं। कोरोना काल में सात अनुष्ठान जो अलग-अलग राज्यों में थे, उन्हें स्थगित करना पड़ा। जबसे अनलॉक शुरू हुआ कुछ पूजा-पाठ प्रारंभ हुआ, लेकिन स्थिति अभी भी ठीक नहीं है। सावन मास में भी जजमानी प्रभावित होती दिख रही है।
नवरात्र में कुछ नहीं हुआ, अब सावन में नहीं आ पाएंगे भक्त
पंडित आंजनेश कहते हैं कि नवरात्र में जब धार्मिक अनुष्ठानों का समय होता है, तब कोरोना के चलते सब कुछ ठप्प रहा। अब सावन मेले में भी श्रद्घालुओं के अयोध्या आगमन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अनुष्ठान कराने वाले भक्त भी अयोध्या नहीं आ पाएंगे। बताया कि आम दिनों में करीब 20 हजार की आय हो जाती थी, पर्व और त्योहारों पर थोड़ी ज्यादा आमदनी होती थी।
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