अयोध्या। 77 एकड़ के रामजन्मभूमि परिसर की लैंड स्केपिंग (साज-सज्जा) भक्तों को लुभाएगी। परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को त्रेतायुग जैसी अनुभूति होगी। परिसर में जो भी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, उन सबकी डिजाइन मंदिर मॉडल की तरह होगी। इसको लेकर शनिवार को समाप्त हुई राममंदिर निर्माण समिति की बैठक में कार्यदाई संस्था के इंजीनियरों ने प्रस्तुतीकरण भी दिया है।
राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि निर्माण समिति की बैठक में इस बार मंदिर परिसर की लैंडस्केपिंग पर वृहद चर्चा हुई है। मंदिर में जो भी सुविधाएं विकसित होंगी उनकी डिजाइन मंदिर मॉडल से मिलती-जुलती हो ऐसा प्रयास है। रामजन्मभूमि पथ के नाम से विकसित हो रहे दर्शन मार्ग के अलावा मंदिर परिसर में भी करीब डेढ़ किलोमीटर का एक अन्य मार्ग भी बनेेगा। यह मार्ग श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट बनवाएगा, जबकि रामजन्मभूमि पथ का निर्माण प्रदेश सरकार करा रही है।
डॉ. अनिल ने बताया कि रामजन्मभूमि पथ की तरह अंदर का मार्ग भी विकसित किया जाएगा। इस मार्ग पर ऐसे पत्थर लगाए जाएंगे, जो मौसम के अनुकूल हो। गर्मी के मौसम पर भक्तों के पांव नहीं जलेंगे और सर्दी में ठंडक का अहसास भी नहीं होगा। इस मार्ग पर भक्तों के लिए मूलभूत सुविधाएं किस स्थान पर विकसित होंगी, इसका प्रजेंटेशन कार्यदाई संस्था के इंजीनियरों ने दिया।
उन्होंने बताया कि इसी तरह मंदिर में फौव्वारा लगाने, त्रिस्तरीय पौधरोपण आदि को लेकर भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। मंदिर की लाइटिंग व्यवस्था पर भी मंथन हुआ है। मंदिर की आंतरिक व बाहर की प्रकाश व्यवस्था अलग होगी। मंदिर के ऊपर, परकोटा आदि पर किस तरह की प्रकाश व्यवस्था हो, इसको लेकर भी प्रस्तुतीकरण दिया गया।