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दीपोत्सव के दीये से चमक उठी कुम्हारों की किस्मत

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अयोध्या के जय सिंह पुर में दीये तैयार करने में जुटे कुम्हार। - फोटो : FAIZABAD
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अयोध्या। रामनगरी में दिव्य दीपोत्सव कुम्हारों की तकदीर भी बदल रहा है। जिस चॉक को नई पीढ़ी छूने से परहेज करती थी, अब उन पर अंगुलियां नाचते नहीं थक रही हैं।
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परिवार का हर सदस्य दीये का आर्डर पूरा करने में जुटा है। इस रोजगार ने कुम्हारी कला को जीवन दान देने का काम किया। अयोध्या शहर से सटे आशिफबाग व जयसिंहपुर गांव के कुम्हारों को करीब 40 परिवारों को चार लाख मिट्टी के दीये बनाने का प्रशासन से ऑर्डर मिला है। रेट भी अच्छा है। लिहाजा महानगरों में जाकर किस्मत तलाशने वाली नई पीढ़ी अब गांव छोड़ने की बात नहीं सोचती।
अयोध्या में योगी सरकार द्वारा आयोजित दीपोत्सव ने मिट्टी के दीये, बर्तन आदि बनाने वालों को संजीवनी देने का काम किया है। उनके चेहरे की रौनक बढ़ गई है।
24 से 26 अक्तूबर को आयोजित दीपोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, थाईलैंड के राजा सहित पूरी योगी कैबिनेट मौजूद रहेगी। रामनगरी में पांच लाख दीपक जलाकर गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने की तैयारी है।
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दीपकों की बढ़ी डिमांड से परंपरागत तरीके से मिट्टी के बर्तन, खिलौने और नाना प्रकार की कलाकृतियों तथा उपयोगी वस्तुओं को बनाकर अपनी आजीविका का निर्वहन करने वाले कुम्हारों की किस्मत ही बदल गई है।
शहर के आशिफबाग व जयसिंहपुर के 40 परिवारों को दीपोत्सव में चार लाख दीये बनाने का आर्डर दिया गया है। ये सभी परिवार दीये बनाने में पूरे उत्साह के साथ जुटे हैं। साथ ही योगी सरकार के इस पहल की मुक्तकंठ से भी प्रशंसा करते हैं। यहां अब तक करीब तीन लाख दीपक तैयार भी किए जा चुके हैं।
कारीगर बोले, दीपोत्सव ने दी संजीवनी
जयसिंहपुर निवासी विनोद कुमार को 35 हजार दिये का ऑर्डर मिला है। वह बताते हैं कि प्रशासन की ओर से 4 लाख दीये बनाकर 24 अक्तूबर तक देने को कहा गया है। आसपास के करीब 40 परिवार दीये बनाने में जुटे हैं। कहते हैं कि इस बार आंगन में फिर मिट्टी के दीये जलेंगे। आशिफबाग के राजितराम, रमेश, राजेश, फूलचंद, ज्ञानचंद, पंचराम, जगराम, तुलसीराम व राजू को क्रमश: 5-5 हजार दीये बनाने को कहा गया है।
वहीं जयसिंहपुर में कुम्हार दूधनाथ पूर्णमासी, रामकिशोर व भगवती को भी 10-10 हजार दीपक बनाने का ऑर्डर मिला है। इसके अतिरिक्त बृजकिशोर, रामकिशोर, व सोमई 5-5 हजार दीये बना रहे हैं। कुम्हारों का कहना है कि दीपोत्सव ने कुम्हारी कला को जहां संजीवनी दी है तो वहीं हमारा कारोबार भी बढ़ा है।
मिट्टी के दीपों से देंगे स्वदेशी का संदेश
मिट्टी के दीपों से रामनगरी को रोशन करने के पीछे स्वदेशी का संदेश भी छुपा है। दिव्य दीपोत्सव को स्वदेशी रंग देने के लिए पांच लाख मिट्टी के दीये जलाए जाएंगे। इस बार राम की पैड़ी के अतिरिक्त शहर के 14 अन्य धार्मिक स्थलों पर भी 1,67,000 मिट्टी के दीये जलाने की योजना है। इसके अतिरिक्त दीपोत्सव में तीन दिनों तक घर-घर मिट्टी के दीपक जलाएं जाए इस प्रयास में प्रशासन जुटा है। नगर निगम ने इसके लिए मुहिम भी शुरू कर दी है। महापौर ऋषिकेश उपाध्याय बताते हैं कि दीपोत्सव को स्वदेशी रंग देने का प्रयास होगा ताकि चायनीज झालरों के बीच मिट्टी के दीपकों की रोशनी मंद न पड़े। सरसों के तेल से दीप जलाकर पूरी रामनगरी में त्रेतायुगीन दृश्य जीवंत करने का प्रयास होगा।
मिट्टी के मूर्तियों की भी बढ़ी मांग
गांव के कुम्हार बताते हैं कि इस वर्ष मिट्टी के मूर्तियों की भी मांग दीपावली में बढ़ी है। बताया कि छोटे दीये की कीमत 40 से 50 रुपये सैकड़ा और बड़े दीयों की कीमत 150-200 रुपये सैकड़ा है। दीपोत्सव के लिए जो दिया तैयार किया जा रहा है, एक दीये में 25 मिली तेल की आवश्यकता होगी। बताया कि धार्मिक मान्यता के अनुसार मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की स्थापना और पूजा का विशेष लाभ होता है। दूसरी तरफ दीपोत्सव में मिट्टी के दीपकों के प्रयोग से भी लोगों में मिट्टी के बर्तनों, मूर्तियों आदि में रुचि बढ़ी है।
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