अयोध्या। 16 कलाओं से युक्त भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर रामनगरी में उल्लास छाने लगा है। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी दो दिन मनाई जाएगी। छह सितंबर को जहां गृहस्थ तो सात सितंबर को रामनगरी के मठ-मंदिरों में उत्सव का आयोजन होगा। इस बार द्वापर की तरह जयंती योग पर भगवान कृष्ण घर-घर जन्मेंगे। इस तिथि पर 36 साल बाद सर्वार्थसिद्ध, रवि, हर्षण और सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी छह सितंबर को मनाई जाएगी। श्रीकृष्ण का अवतार द्वापर युग के अंतिम चरण में भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मध्यरात्रि 12 बजे वृषभ लग्न में हुआ था। इस दिन बुधवार व रोहिणी नक्षत्र से बना जयंती योग था। इस वर्ष भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र के साथ बुधवार का योग भी भक्तों को प्राप्त होगा।
भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि 6 सितंबर को दिन में 3:38 बजे लगेगी, जो कि 7 सितंबर की शाम 4:15 बजे तक रहेगी। वहीं रोहिणी नक्षत्र का प्रभाव 6 सितंबर को दिन में 9:20 बजे से आरंभ होगा और 7 सितंबर को दिन में 10:25 बजे तक रहेगा। कौशल्यानंदन के अनुसार, बुधवार का दिन, अर्द्धरात्रि की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृष राशि के चन्द्रमा के फलस्वरूप जयंती योग बनेगा।