16-अयोध्या-कनकमहल में सजी फूल बंगले की भव्य झांकी
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अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा के अनुपालन में ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर्व पर कनक बिहारी सरकार की भव्य फूलबंग्ला झांकी सजायी गयी, लेकिन कोरोना के चलते घोषित लॉकडाउन के कारण उत्सव सीमित आयोजन के मध्य मनाया गया और मंदिर के गर्भगृह तक ही सीमित रहा। फूलबंग्ला झांकी के दर्शन के लिए जहां हजारों भक्त, श्रद्घालु, संत-धर्माचार्य उमड़ते हैं वहीं इस बार मंदिर बंद होने के कारण भक्तों को झांकी का दर्शन सुलभ नहीं हो सका।
ज्येष्ठ मास की अमावस्या को परंपरागत रूप से कोरोना के साए के बीच कनक भवन मंदिर में कनक बिहारी सरकार की भव्य फूलबंग्ला झांकी सजाई गयी। हालांकि मंदिर बंद होने के कारण भक्त झांकी का दर्शन नहीं कर सके, बावजूद इसके परंपरा का निर्वहन करते हुए विभिन्न प्रकार के सुगंधित पुष्पों से कनक बिहारी सरकार का भव्य झांकी सजाई गई। इस वर्ष लॉकडाउन के चलते कोई बड़ा आयोजन नहीं हुआ, सीमित कार्यक्रमों के बीच शुक्रवार की रात्रि 8 बजे झांकी का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर कनकबिहारी सरकार की भव्य आरती उतारी गयी।
ज्येष्ठ मास में ही रामनगरी के अन्य मंदिरों में भी भगवान को शीतलता प्रदान करने के उद्देश्य से झांकी सजायी जाती थी लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते कनक भवन को छोड़कर अन्य मंदिरों दशरथमहल बड़ा स्थान, रंगमहल, मणिरामदास की छावनी, हनुमानगढ़ी आदि में यह उत्सव नहीं हो सका।दशरथ महल बड़ास्थान के महंत बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य के शिष्य संत रामभूषण दास कृपालु महाराज बताते हैँ कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुत: अर्चावतार की भांति हैं।
मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी धर्मनगरी अयोध्या में हो रहा है।