बीते माह सरयू में आई बाढ़ थमने के बाद काफी नीचे पहुंचे जलस्तर में दो दिनों से अचानक बढ़ोतरी से हलचल मची हुई है। तटीय इलाकों में नदी की लहरें सैकड़ों एकड़ भू-भाग को अपने आगोश में ले रही है। कटान से रुदौली में तटीय क्षेत्र के तीन घर धारा में समा गए हैं, जबकि पूरा ब्लॉक के छह गांवों में कटान तेज है।
दो दिनों से उफनाई सरयू का असर तटीय क्षेत्रों से सटे इलाकों पर दिख रहा है। तेजी से बढ़ते जलस्तर ने कछार के इलाकों को अपने आगोश में ले लिया है। हालांकि नदी का जलस्तर लाल निशान 92.730 मीटर से अभी 49 सेंटीमीटर नीचे है।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, दो दिनों से तेजी से बढ़ रहा जलस्तर गुरुवार की मध्य रात्रि लगभग 11 बजे 92.280 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया था जो शुक्रवार को पूर्वाह्न लगभग 11 बजे तक स्थिर रहा। 12 बजे से जलस्तर में आधे सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गिरावट शुरू हो गई है।
बताया कि शाम पांच बजे नदी के जलस्तर में एक सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से गिरावट शुरू हो गई है। शाम पांच बजे नदी का जलस्तर 92.240 मीटर दर्ज किया गया है। सरयू के गिरते जलस्तर से नदी के तटीय इलाकों में कटान का खतरा अब गंभीर हो गया है।
शुजागंज प्रतिनिधि के मुताबिक, रुदौली तहसील ग्राम पंचायत कैथी के कैथी माझा में नदी किनारे कटान से खुशीराम, लल्लन और राम पाल के मकान पानी में समा गए। इस गांव के ग्रामीणों को दुश्वारियों का समाना करना पड़ रहा है। वे केवल नाव के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
तहसील प्रशासन से कोई कर्मचारी व क्षेत्र के लेखपाल भी नहीं पहुंचे और न ही प्रशासन की ओर से कोई मदद दी गई। ग्रामीण रामजस फूलबहादुर, परशुराम बताते हैं कि आज तक कोई भी यहां देखने नहीं आया कि क्षेत्र के लोग कैसे जीवन जी रहे हैं।
उधर, सदर तहसील के पूरा ब्लॉक अंतर्गत काजीपुर, मूड़ाडीहा, मांझा समेत छह गांवों में कटान से कृषि भूमि नदी में समा रही है। रुदौली के तहसीलदार ज्ञानचंद गुप्त बताते हैं कि कटान की जानकारी नहीं है, फिर भी लेखपाल को जांच के लिए भेजा जा रहा है। अभी हालात नियंत्रण में है।