मनमानी कार्यशैली को लेकर लंबे समय से निशाने पर रहे सीएमओ डॉ. राधेश्याम यादव पर आखिरकार गाज गिर गई। ताजा मामला मंडलीय अस्पताल दर्शननगर में सेवा प्रदाता कंपनी के जरिए नर्स, अर्दली, वार्ड ब्वाय, तकनीशियन पदों पर हुई 45 फर्जी नियुक्तियों को लेकर है।
मामले में एडी व एसडीएम सदर की संयुक्त जांच में दोषी पाए गए सीएमओ के खिलाफ डीएम ने कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेजी थी।
सोमवार को चुनाव आयोग से अनुमति लेकर शासन ने सीएमओ को उनके पुराने पद जिला क्षय रोग अधिकारी पर रिवर्ट करने का आदेश जारी किया है।
अब नए सीएमओ के रूप में अलीगढ़ में वरिष्ठ परामर्शदाता पद पर कार्यरत प्रमोद कुमार को जिले का नया सीएमओ बनाया गया है।
सीएमओ पद पर बीते साल 9 अक्तूबर को तैनात किए गए डॉ. राधेश्याम के खिलाफ पहले भी कई मामले सामने आए थे। डीएम अनिल ढींगरा ने संविदा पर तैनात कर्मियों की समीक्षा के बाद ही सेवा बढ़ाने व वेतन देने के निर्देश दिए थे।
इसे लेकर छह माह तक वेतन बाधित रहा, जिलेभर में सैकड़ों संविदा कर्मियों ने आंदोेलन किया। एनएचएम के कई और मामलों में भी सीएमओ की कार्यशैली निशाने पर रही।
इस बीच अपर निदेशक स्वास्थ्य व परिवार कल्याण डॉ. एचएन तिवारी से मंडलीय अस्पताल में सीएमएस और डॉक्टरों की तैनाती को लेकर विवाद सड़क पर आ गया।
सीएमएस एके सिंह को सीएमओ ने पदभार ही नहीं लेने दिया, बाद में वे पद संभाले ही थे कि स्वास्थ्य मंत्री की जांच में नप गए।
इस बीच पंचायत चुनाव के दौरान शिकायत मिली कि सीएमओ ने आचार संहिता लागू होने के बाद मंडलीय अस्पताल में दर्जनों नियुक्तियां कर लीं। मामले में डीएम और एडी दोनों ने सख्त कदम उठाए।
डीएम के निर्देश पर एडी और एसडीएम सदर अमित सिंह ने सीएमओ दफ्तर पर छापा मारा था, पर दस्तावेज नहीं मिले। इस बीच जॉइनिंग करने गए कर्मियों से रिकॉर्ड लेने के बाद दस्तावेज खंगाले गए तो 45 नियुक्तियां नियम विरुद्ध मिलीं।
एडी डॉ. तिवारी ने बताया कि मामले में शासन ने सीएमओ को पुराने पद जिला क्षयरोग अधिकारी पर रिवर्ट कर दिया है। जबकि नए सीएमओ के रूप में अलीगढ़ में वरिष्ठ परामर्शदाता पद पर कार्यरत प्रमोद कुमार को फैजाबाद में तैनात किया गया है।