जिले के लिए आवंटित तकरीबन दो हजार क्विंटल धान वापस होने के हालात हैं। किसानों का कहना है कि उपज तो अच्छी होती है, लेकिन न तो क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए किसानों को मशकक्त करनी पड़ती है। और तो और धान में सामान्य प्रजाति की तरह स्वाद भी नहीं होता है।
जिले में हाईब्रीड धान के लिए पहली बार ऑनलाइन अनुदान का भुगतान के लिए कार्ययोजना तैयार की गई। अनुदान के लिए किसानों को पहले रजिस्ट्रेशन कराना था और पूरी दर पर किसानों को धान खरीदना है।
बाद में किसानों के खाते में राज्य सरकार का अनुदान 80 रुपये प्रति किलोग्राम और केंद्र सरकार का अनुदान 50 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से ऑन लाइन भुगतान किया जाना है। हाईब्रीड धान के लिए जिले में छह हजार किसानों ने आवेदन किया, लेकिन अब तक 268 किसानों ने ही हाईब्रीड धान के बीज को खरीदा।
सरकार की हाईब्रीड योजना में किसानों का तनिक भी दिलचस्पी नहीं है। अब अधिकारी भी दबी जुबान से कह रहे हैं कि जिले के लिए आवंटित धान का अधिकतम हिस्सा लौटाना ही पड़ेगा।
हाईब्रीड धान के लिए 30 अप्रैल तक किसानों का रजिस्ट्रेशन की तिथि निर्धारित की गई थी और बिक्री के लिए 15मई। अनुदान के लिए किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया, लेकिन बीज खरीदने नहीं आए।
इस पर कृषि विभाग ने पहले 20 मई, फिर 30 मई, 15 जून और अब 30 जून तक बिक्री की तिथि बढ़ा दी है। लेकिन अभी तक महज डेढ़ सौ क्विंटल ही धान का बीज बिका है। ऐसे में तकरीबन दो हजार क्विंटल से अधिक हाईब्रीड धान लौटाए जाने का अनुमान है।
जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेश कुमार यादव का कहना है कि कृषि विभाग का कार्य धान की बुआई कराना और किसानों को नई तकनीकी मुहैया कराना है। जो विभाग कर रहा है। शासन से जैसा निर्देश दिया जाता है उसी अनुरूप कार्य किया जाता है।