अयोध्या। जिले में मरीजों की संख्या घटने से कोविड हॉस्पिटल व क्वारंटीन सेंटर खाली हो गए हैं। कुल 512 बेड के एल-1 व एल-2 हॉस्पिटल में मात्र 31 मरीज ही भर्ती हैं। एल-1 के अस्पतालों में काफी दिनों से मरीजों ही नहीं हैं।
जिले में कोरोना का कहर बढ़ने पर हल्के लक्षण वाले एवं बिना लक्षण वाले मरीजों को एल-1 के समकक्ष अस्पतालों में रखा जाता था जबकि गंभीर मरीजों को एल-2 श्रेणी के अस्पताल में भर्ती किया जाता था। एल-1 श्रेणी के जिले में तीन अस्पताल बनाए गए जिनमें झुनझुनवाला कोविड केयर सेंटर में 80 बेड, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मसौधा में 32 व कोविड केयर चिकित्सालय कुमारगंज में दो सौ बेड आरक्षित किए गए। वहीं राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर को दो सौ बेड का एल-2 हॉस्पिटल बनाया गया।
इसके अलावा काफी संख्या में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए थे जहां मरीजों की रिपोर्ट आने तक उन्हें रखा जाता था। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हें कोविड अस्पताल व निगेटिव आने पर होम क्वारंटीन के लिए भेजा जाता था। जिले में 454 बेड की क्षमता के तीन क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इन सभी व्यवस्थाओं के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन मौजूदा समय में ये सभी अस्पताल व क्वारंटीन सेंटर खाली से हो गए हैं।
होम आइसोलेशन की व्यवस्था शुरू होने के बाद से एसिंप्टोमेटिक मरीजों को घर पर ही आइसोलेट करने की व्यवस्था की गई। हालांकि अस्पतालों की बदहालियों से बचने के लिए हल्के लक्षण वाले लोग भी होम आइसोलेट हो गए। ऐसे में एल-1 के समकक्ष अस्पतालों की जरूरत ही न के बराबर हो गई।
इसी की नतीजा है कि मौजूदा समय में एल-1 के समकक्ष तीनों अस्पतालों में एक भी मरीज नहीं हैं जबकि दो सौ बेड के एल-2 हॉस्पिटल में सिर्फ 31 मरीज भर्ती हैं और 169 बेड रिक्त हैं। वहीं, 454 बेड के क्वारंटीन सेंटर में सिर्फ मेडिकल कॉलेज में एक व्यक्ति को रखा गया है, बाकी 453 बेड रिक्त हैं।
होम आइसोलेशन की सुविधा शुरू होने पर एल-1 के समकक्ष अस्पताल रिक्त हो गए जबकि गंभीर मरीजों का इलाज एल-2 हॉस्पिटल में चल रहा है। अन्य देशों में कोरोना का प्रकोप थमने के बाद दोबारा संक्रमण बढ़ा है। इसलिए अभी भी अस्पतालों को आरक्षित किया गया है।
-डॉ घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या