पुनीत श्रीवास्तव
अयोध्या। आयुष्मान योजना के लाभार्थियों के पांच साल के आंकड़ों ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है। सरकारी अस्पतालों में बढ़ी मरीजों की खरीद-फरोख्त, संसाधनों के अभाव और मरीजों से अभद्रता का नतीजा ये रहा कि योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 75 फीसदी मरीज इलाज के लिए निजी अस्पताल पहुंचे। बमुश्किल 25 फीसदी ही मरीज सरकारी अस्पतालों में भर्ती हो सके। निजी अस्पतालों के महंगे इलाज से मरीज आयुष्मान कार्ड खाली करा बैठे।
पांच लाख रुपये तक के कैशलेस इलाज के लिए 23 सितंबर 2018 को आयुष्मान योजना की शुरुआत हुई थी। जिले में 2,49,274 परिवारों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर नीरज शर्मा ने बताया कि पांच साल में 30,380 मरीज कैशलेस इलाज का लाभ उठा चुके हैं। इसमें से 22,780 मरीजों ने निजी चिकित्सालयों में इलाज कराया है। 7600 मरीजों ने ही सरकारी अस्पतालों में इलाज कराया है। संवाद
सरकारी अस्पतालों में दलाल हावी
सरकारी अस्पतालों में दलाल हावी हैं। वे मरीजों को झांसे में लेकर निजी चिकित्सालयों में पहुंचाते हैं। इसे लेकर कई बार शिकायतें हुई हैं। तहरीर दी गईं, लेकिन उन पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। अभी कुछ दिन पहले ही जिला महिला अस्पताल में नवाबगंज गोंडा से आए राहुल श्रीवास्तव की पत्नी को दलाल ने शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया था। करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया था। मामला काफी सुर्खियों में रहा।
निजी अस्पताल पहुंचने के ये भी कारण
सरकारी अस्पतालों में स्टाफ का टोटा, भर्ती मरीजों को डॉक्टरों की ओर से कम समय देना, सरकारी अस्पतालों में दवाओं की अनुपलब्धता, साफ-सफाई का अभाव, चिकित्सा विशेषज्ञों की कमी
योजना से जुड़े हैं 17 निजी अस्पताल
आयुष्मान योजना से मेडिकल कालेज, जिला महिला व पुरुष चिकित्सालय व श्रीराम चिकित्सालय, सीएचसी के अलावा जिले के 17 निजी अस्पताल जुड़े हैं। आयुष्मान कार्डधारक का यहां पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज होता है। इलाज में आए खर्च का भुगतान सरकार करती है।
हम किसी पर दबाव नहीं बना सकते
हम किसी के ऊपर दबाव नहीं बना सकते। मरीज अपने विवेक से कार्य करता है। सरकारी अस्पतालों में भी अच्छा इलाज मिलता है। आयुष्मान योजना से जोड़ने के बाद उन्हें जागरूक भी किया जाता है।
डॉ. संजय जैन, सीएमओ