ढाई साल बाद गुमनामी बाबा उर्फ भगवानजी उर्फ सुभाषचंद्र बोस के महत्वपूर्ण सामान को संरक्षित कर म्यूजियम में रखे जाने की आस जगी है। प्रदेश सरकार की ओर से इस पर कार्रवाई की पहल की गई है। सामान को अयोध्या के राम कथा संग्रहालय में म्यूजियम बनाकर रखा जाएगा, लेकिन सुभाष चंद्र बोस विचार मंच ने बगैर केंद्रीय बलों की सुरक्षा के महत्वपूर्ण सामान म्यूजियम में रखे जाने पर आपत्ति जताई है।
प्रदेश सरकार से ढाई साल बाद यह कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश के संदर्भ में शुरू की जा रही है। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 31 जनवरी 2013 को सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र फैजाबाद बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य में इस आशय का आदेश दिया था। इनमें मुखर्जी आयोग से जांच के लिए ले जाए गए गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी के सामान को वापस लाया जाना है।
सभी सामान की म्यूजियम में रखवाने की व्यवस्था करना और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में नेताजी सुभाषचंद्र बोस/गुमनामी बाबा उर्फ भगवान जी की पहचान के लिए अलग से आयोग गठित किए जाने के लिए कहा गया था।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद कोषागार में रखे गुमनामी बाबा के हजारों की संख्या में सामान और मुखर्जी आयोग से ले जाए गए सामान को वापस लाने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में फैसला लिया गया था। इसके बाद जस्टिस मुखर्जी आयोग द्वारा फैजाबाद कोषागार से प्राप्त किए गए सामान को गृह मंत्रालय नई दिल्ली के राष्ट्रीय अभिलेखागार से लाकर तीन जनवरी 2014 को ही कोषागार के डबल लॉक में रख दिया गया।
इनकी संख्या लगभग 2760 बताई गई है। इसको अयोध्या के राम कथा संग्रहालय में रखने का भी फैसला लिया गया था, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी राम कथा संग्रहालय में स्थान नहीं मिल पाया था। अब प्रदेश सरकार की ओर से गुमनामी बाबा के सामान को राम कथा संग्रहालय में म्यूजियम बनाकर संरक्षित करने के साथ ही आम जन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक इसके लिए मुख्यमंत्री ने हरी झंडी दे दी है। इसका उद्घाटन 15 अगस्त या नेताजी की जयंती 23 जनवरी को किया जा सकता है।
सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय विचार केंद्र के अध्यक्ष शक्ति सिंह के मुताबिक गुमनामी बाबा/नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने अयोध्या-फैजाबाद में लगभग साढ़े बारह साल गुजारे थे। अयोध्या में लगभग 10 साल रहे। उसके बाद वह ढाई साल तक फैजाबाद के राम भवन में रहे। 17 सितंबर 1985 को उन्होंने शरीर त्याग दिया था।