परिक्रमा मेले के अंतिम स्नान कार्तिक पूर्णिमा पर सोमवार को लाखों श्रद्धालुओं ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई। यह सिलसिला अलसुबह से ही शुरू हुआ तो पौ फटने के साथ यह और प्रगाढ़ होता गया।
सरयू के स्नान घाट से प्रमुख मंदिरों की ओर जाने वाले मार्ग श्रद्धालुओं से पटे रहे। दूसरी बेला के बाद मेलार्थियों की भीड़ ने मेला क्षेत्र से अपने घरों को लौटने लगी। इसी के साथ ही सप्ताह भर से चल रहा कार्तिक पूर्णिमा मेला भी संपन्न हो गया।
आठ नवंबर को चौदह कोसी परिक्रमा के साथ आरंभ हुए कार्तिक पूर्णिमा मेले के अंतिम पर्व पर स्नान-दान व दर्शन-पूजन के लिए पूर्व संध्या से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी थी। हालांकि कार्तिक पूर्णिमा तिथि की रविवार की शाम सात बजकर 56 मिनट पर ही शुरू हो गई लेकिन उदया तिथि के कारण स्नान पर्व की शुरूआत सोमवार की भोर से आरंभ हुआ।
भोर से ही श्रद्धालुओं का रेला सरयू के स्नान घाटों पर स्नान के लिए जुटने लगा। श्रद्धालुओं ने पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाई और गोदान की परंपरा का भी निर्वहन बढ़-चढ़ कर किया। सूर्योदय के बाद पूर्वाह्न तक चले इस क्रम के साथ मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब दर्शन-पूजन के लिए जुटने लगा।
पौराणिक महत्व की पीठ नागेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं ने यथा शक्ति तथा भक्ति भाव से भोले बाबा का अभिषेक किया। अधिसंख्य ने तो पावन सलिला के जल से बाबा को अभिषिक्त किया तो ऐसे भी कम नहीं रहे, जिन्होंने दूध, घृत अथवा शहद से इस विशेष पर्व पर बाबा का अभिषेक किया।
नगरी के आराध्य भगवान राम और उनके प्रिय दूत हनुमंत लला के दरबार बजरंगबली की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी, वैष्णव परंपरा की आस्था के केंद्र में रहने वाला कनक भवन, रामजन्म भूमि आदि मंदिरों पर सुबह से दर्शनार्थियों की लगी कतार देर रात तक कायम रही।
स्नान-दान व दर्शन पूजन के बाद दूसरी बेला लगने के साथ ही मेलार्थियों की मेला क्षेत्र से घर वापसी का दौर भी शुरू हो गया। रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन यात्रियों की भीड़ जमा रही।
मेले के अंतिम पर्व को सकुशल निपटाने के लिए मेला प्रशासन ने भी सुरक्षा व अन्य व्यवस्थाओं को लेकर शनिवार से ही डटा रहा।
स्नान घाटों के साथ प्रमुख मंदिरों व संवेदनशील स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। सुरक्षा की दृष्टि से स्नान के बाद नगरी के मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए जाने वाले यात्रियों को डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर से गुजारा जाता रहा।
यही हाल नागेश्वरनाथ, हनुमानगढ़ी, कनक भवन मंदिरों में भी दर्शन व्यवस्था की रही। मेला कंट्रोल रूम में लगे सीसी टीवी कैमरों से भी मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी नजर रखी जाती रही। अफसर मेला क्षेत्र में कैंप कर व्यवस्थाओं की मानीटरिंग करने के साथ ही आवश्यक दिशा-निर्देश देते रहे।