पुरातत्व विभाग ने डीएम व विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने व नवनिर्माण को ध्वस्त कराने की सिफारिश की है। साथ ही कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने को तहरीर भी दी है लेकिन पुलिस-प्रशासन व प्राधिकरण इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
अफसरों की खामोशी ने न जाने कितने सवालों को जन्म ही नहीं दिया बल्कि समाजवादी विचारधारा के अलंबरदारों को भी सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
रीडगंज स्थित आचार्य नरेंद्रदेव की कोठी को होटल बनाने की जैसे ही कोशिशें शुरू हुईं, पुरातत्व विभाग संवेदनशील हो गया। संरक्षण सहायक प्रथम डीके जायसवाल ने प्रशासन, पुलिस के साथ ही एएफडीए व कोतवाली नगर को होटल का निर्माण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र लिखे मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
नतीजतन सात माह से कोठी परिसर में दर्जनों मजदूर दिन-रात निर्माण कार्य कर रहे हैं। अयोध्या-फैजाबाद विकास प्राधिकरण में होटल बनवाने वालों ने नक्शा स्वीकृत कराने के लिए आवेदन किया तो प्राधिकरण ने आपत्ति व सुझाव मांगे। इसी क्रम में पुरातत्व विभाग ने प्राधिकरण के सचिव को अवैध निर्माण को ध्वस्त कराने की संस्तुति की जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
अयोध्या फैजाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष राजेश कुमार का कहना है कि नक्शा स्वीकृत करने का आवेदन दिया गया है लेकिन नक्शा स्वीकृत करने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। प्रतिषिद्ध क्षेत्र में किसी भी निर्माण को प्राधिकरण स्वीकृति नहीं देगा। यदि निर्माण हो रहा है तो इसकी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
संरक्षण सहायक प्रथम गुलाबबाड़ी सर्किल डीके जायसवाल ने कहा कि अवैध निर्माण को रोकने लिए हमने कई बार पत्र लिखे, नगर कोतवाली में तहरीर दी। प्राधिकरण के सचिव को भेजे पत्र में नक्शा स्वीकृत नहीं करने की संस्तुति के साथ ही अनुरोध किया कि जो निर्माण कराया गया है, वह पूर्णतया अवैध है, अत: उसे ध्वस्त किया जाए।
वहीं, इस बारे में नगर कोतवाली के इंस्पेक्टर एचएन सिंह का कहना है कि, पुरातत्व विभाग की ओर से गुलाबबाड़ी के बगल में हो रहे अवैध निर्माण की बाबत शिकायत मिली है। संबंधित पुलिस चौकी को जांच के लिए कहा गया है। जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।