जिनके ऊपर ज्ञान देने की जिम्मेदारी है वे अपनी भूमिका से बच रहे हैं। राज्यपाल ये विचार डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में रखे।
‘भारत में उच्च शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य : चुनौतियां एवं संभावनाएं’ वषय पर सेमिनार में बोलते हुए राज्यपाल ने आधुनिक शिक्षा में प्राचीन गुरुकुल शिक्षा का चूर्ण मिलाकर उच्च शिक्षा को सुधारने की सीख दी।
कहा, शिक्षा के लिए कई आयोग बनने के बाद भी इसकी हालत में सुधार नहीं आ रहा है। इसकी वजह है सुझाव को व्यवहार में न लाया जाना। प्राइमरी में नौ छात्र प्रवेश लेते हैं तो कॉलेज तक एक ही पहुंच पाता है।
दस इंजीनियर में केवल चार ही भारतीय अच्छी नौकरी पाने के योग्य होते हैं। इसके कारणों पर विचार होना चाहिए। दीक्षांत समारोहों में अंग्रेजों के जमाने के गाउन और हाल ही में लखनऊ के एमबी क्लब में ड्रेस कोड के चलते मौलाना कल्वे जव्वाद को प्रवेश न दिये जाने का जिक्र करने के साथ राज्यपाल ने कॉलेजों में हो रही नकल पर भी प्रहार किया।
राज्यपाल ने गुणवत्ता और ज्ञानपरक शिक्षा पर जोर देते हुए दिल्ली के एक कॉलेज का जिक्र किया। कहा कि वहां इस बार 96 प्रतिशत अंक पाने वालों का दाखिला हुआ है। इसी देश में सीवी रमन और जगदीश चंद्र बोस पैदा हुए थे, आखिर अब क्यों नहीं पैदा हो रहे हैं?
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों का काम केवल डिग्री देना रह गया है। डिग्री के साथ गुणवत्ता और रोजगार परक शिक्षा भी होनी चाहिए। निजी क्षेत्र में यदि शिक्षा अच्छी है तो वहां धनवान ही जा सकते हैं। जिन होनहारों को वहां शिक्षा मिलनी चाहिए, उनके लिए धन के अभाव में ऐसे संस्थानों के दरवाजे बंद हो जाते हैं।
शिक्षकों पर कटाक्ष करते हुए राम नाईक ने कहा कि निजी कॉलेज शिक्षा देने के नाम पर कमाई कर रहे हैं। आज ऐसे कॉलेजों का मकसद अनऑफिसियली ‘कॉमर्शियलाइजेशन ऑफ एजूकेशन’ हो गया है। ऐसे में हमारी भी जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक उच्च शिक्षा मिले।
युवाओं का कौशल विकास कैसे हो? इस पर भी ध्यान दिया जाये। उन्होंने कहा कि आज की जरूरत विद्यार्थियों का कौशल विकास है। विद्यार्थियों को केवल डिग्री ही न मिले, बल्कि ऐसी शिक्षा भी मिले, जिससे वह ज्ञानवान बनें, अपने पैरों पर खड़े हो सकें, पेट की भूख शांत करने के लिए रोजगार भी पा सकें ।
केंद्र सरकार के पास रखीं व नेताजी (सुभाषचंद्र बोस) से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक किया जाना गंभीर विषय है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसकी पहल की है। मामले में निश्चित ही केंद्र सरकार विचार व निर्णय करेगी। यह प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णय है।
इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते। यह बात राज्यपाल ने विवि के प्रेक्षागृह से निकलकर मीडिया से एक सवाल के जवाब में कही। नाइक ने अयोध्या में राममंदिर के सवाल पर कहा कि कितनी बार यह सवाल पूछेंगे आप? फैजाबाद में भी इसका उत्तर दे चुके हैं। कुछ लोग मामले को हाईकोर्ट ले गए। हाईकोर्ट ने नहीं माना तो इसे सुप्रीम कोर्ट में ले गए। इस बारे में पहले जो कहा है, वह सभी को मालूम है।