जिले के एनएचएम (नेशनल हेल्थ मिशन) घोटाले की चल रही सीबीआई जांच से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। उसकी पड़ताल में नित नए खुलासे हो रहे हैं। जांच अधिकारियों के रडार पर पूरा बाजार, सोहावल, मया और तारुन के अधीक्षक भी हैं।
यहां पर तैनात तत्कालीन अधीक्षकों ने नियम कानून को ताख पर रखकर चहेती एएनएम और आशा बहू को लाभ पहुंचाने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। और तो और एक-एक प्रसूता के नाम से दो-दो बार चेक जारी कर दिए गए हैं।
सीबीआई के अफसर शनिवार से जिले में मौजूद हैं। उन्होंने सीएमओ कार्यालय से महिला अस्पताल को हस्तांतरित किए गए धन का पूरा विवरण तलब किया है। कागजों के मिलान में तस्वीर साफ हो जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की जिन महिलाओं का जिला महिला अस्पताल में प्रसव कराया गया है, उन्हें एक नहीं दो-दो बियरर चेक जारी किए हैं।
एक चेक महिला अस्पताल की ओर से तो दूसरा चेक स्थानीय पीएचसी से जारी किया गया। फर्जी प्रसव के खेल में आशा बहुओं की भूमिका भी अहम है। पीएचसी के अधीक्षकों ने आशा बहुओं को शहर या नर्सिंगहोम में प्रसव कराने वाली महिलाओं के चिन्हांकन का जिम्मा सौंपा था।
ये आशा बहुएं जिला अस्पताल में हुई डिलीवरी को पीएचसी पर होना दर्शाती थीं, जिसके बदले आशा को 600 रुपए और प्रसूता के नाम से 1400 रुपये का वियरर चेक काट दिया जाता था। इस प्रकार की सबसे अधिक गड़बड़ी पूराबाजार और सोहावल में पाई गई है।
इन दोनों सीएचसी क्षेत्र में गैर जिलों की प्रसूताओं को भी अपने क्षेत्र में दर्शा कर धन निकाल लिया गया है। मया बाजार में तो एक एएनएम की बहू ही आशा बहू है। शासन से एक हजार की आबादी पर एक आशा बहू की तैनाती की गई है।
जनसंख्या वृद्धि दर के आंकड़े बताते हैं एक हजार की आबादी पर एक वर्ष में अधिकतम छह से सात गर्भवती महिलाओं का प्रसव हो सकता है। माया बाजार में तो एक आशा बहू 36 प्रसव करा चुकी है, जिसे स्वास्थ्य विभाग से धन भी हस्तांतरित कर दिया गया है। यही हाल तारुन बाजार, खंडासा और मवई सीएचसी का भी है।