रामजन्मभूमि परिसर में निर्माणाधीन यज्ञ मंडप
अयोध्या। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए रामजन्मभूमि परिसर में दो मंडप में नौ हवन कुंडों का निर्माण किया जा रहा है। इसके निर्माण से पहले काशी के आचार्याें ने शास्त्रों का अध्ययन किया। फिर कुंड का निर्माण शुरू किया है। आचार्यों की माने तो किसी भी अनुष्ठान के शुभ फल के लिए हवन कुंडों के निर्माण में लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई और गहराई का विशेष ध्यान दिया जाता है। दो मंडपों में कुल नौ कुंड बनाए जाएंगे। इसमें आठ कुंड आठ दिशाओं में होंगे, जबकि एक कुंड आचार्य के लिए बनाया जाएगा। इन कुंडों के निर्माण में महापंडित विट्ठल दीक्षित रचित मंडप कुंड सिद्धि नामक ग्रंथ की मदद ली गई है। कुंडों के निर्माण की पद्धति और विशेषता के बारे में विस्तृत जानकारी है। ईश्वर संहिता और पंचरात्रागम में यज्ञ कुंडों की ज्यामिति, परिमाप और शुभ फलों का जिक्र है, इसका भी अध्ययन आचार्यों ने किया है।
काशी से आए आचार्य अरुण दीक्षित ने बताया कि कुंड की ज्यामिति एक विज्ञान है, जो फल देने वाली होती है। शास्त्रीय पद्धति से आठों दिशाओं में आठ कुंड बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक कुंड में तीन सीढि़यां होंगी। ऊपर की सफेद सीढ़ी विष्णु के लिए, बीच की लाल सीढ़ी ब्रह्मा और अंतिम काली सीढ़ी भगवान रुद्र के आह्वान के लिए बनाई जाएगी। कुंड की लंबाई और चौड़ाई 25़ 5 इंच होगी। तीन सीढि़यां चार-चार इंच की होगी। शास्त्रीय तरीके से कुंड के पूरे पांच अंग बनाए जाएंगे।
नौ कुंडों का विवरण
- पूर्व सर्व सिद्धिदायक चौकोर कुंड
- आग्नेय में पुत्र प्राप्ति और कल्याण के लिए योगिनी कुंड
- दक्षिण में कल्याणकारी अर्धचंद्राकार कुंड
- नैऋत्य में शत्रुनाश के लिए त्रिकोण
- पश्चिम में शांति-सुख के लिए वृत्ताकार
- वायव्य में मारण और उच्छेद के लिए षडस्त्र कुंड
- उत्तर में वर्षा के लिए पद्म कुंड
- ईशान में आरोग्य के लिए अष्टासत्र कुंड
- ईशान और पूर्व के बीच सभी सुखों की प्राप्ति के लिए आचार्य कुंड