बुनियादी शिक्षा शहर से लेकर सुदूर गांवों तक बदहाली से हांफ रही है। दावे चाहे जितने बड़े-बड़े किए जाते हो लेकिन जमीनी हकीकत बदरंग तस्वीर लिए हुए है। बिजली से रोशन तो किए गए लेकिन रोशनी कुछ ही स्कूलों में है। नगर क्षेत्र में किराए के भवन में स्कूल चल रहे हैं। चारदीवारी टूटी है, छत भी दरक गई है। फर्श चिटके हैं और शौचालय भी निष्प्रयोज्य जैसी स्थिति में है।
सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के बेसिक स्कूलों की बदहाली पर कड़ी फटकार लगाई है। जिले में कुल 2250 परिषदीय स्कूल है, जिसमें तकरीबन दो लाख सात हजार छात्र/छात्राएं नामांकित हैं। ज्यादातर स्कूलों का भवन, शौचालय, चारदीवारी खस्ताहाल है।
फैजाबाद और अयोध्या नगर में ही बुनियादी शिक्षा की हालत ज्यादा खराब है। जर्जर किराए के एक-दो कमरों में चलने वाले स्कूलों के बच्चों को ठीक से सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। कहीं पर सिर्फ एक-दो कमरे में स्कूल चल रहा है तो कहीं पर बरामदे में बच्चों को बिठाकर भविष्य संवारा जा रहा है।
नगर क्षेत्र के 56 स्कूलों में तकरीबन 3500 छात्र/छात्राएं नामांकित है। नगर में प्राथमिक स्कूलों की तादात 43 है और पूर्व माध्यमिक स्कूलों की संख्या 13 है। लेकिन इनमें जहां किराए के भवन में स्कूल चलते हैं, वहां तो छात्र/छात्राओं की तादाद सिर्फ रस्म अदायगी भर रह गई है।
हाल यह है कि प्राथमिक स्कूल मोदहा, बछड़ा, सुल्तानपुर, देवकाली, सोनखरकुंड, स्वर्गद्वार और वेगमपुरा तथा जूनियर हाईस्कूल सोनखरकुंड आदि नौ स्कूल किराए के भवन में संचालित हो रहे हैं। इनमें से प्रा.वि. हैदरगंज द्वितीय, प्रा.वि. मोदहा, प्रा.वि. सोनखरकुंड, प्रा.वि. बेगमपुरा, प्रा.वि. जानकीघाट और जूनियर हाईस्कूल सोनखरकुंड में बच्चों की सुविधा के लिए शौचालय की व्यवस्था की गई है। प्रा.वि. हसनू कटरा की दीवार जर्जर हो गई है, स्टोर रूम भी टूट-फू ट गया है। छज्जा जर्जर स्थिति में है।