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प्रशासनिक उपेक्षा से जर्जर हो रहीं ऐतिहासिक धरोहरें

Sun, 17 Apr 2016 11:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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धरोहर - फोटो : अमर उजाला
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अवध की धरती फैजाबाद फारसी स्थापत्य शैली के गौरवपूर्ण ऐतिहासिक इमारतों का खजाना है। लेकिन नवाबी युग के चमकते-दमकते धरोहरों पर लापरवाही की धूल चढ़ गई है। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इसकी आभा फीकी पड़ रही है। लखनऊ से पहले अवध की राजधानी यहीं थी। यहां पर इमारतों की एक संस्कृति खूब फली-फूली, जिसके चिह्न आज भी कई जगहों पर मौजूद हैं।
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नाका मकबरा स्थित बहू-बेगम का मकबरा, रीडगंज स्थित गुलाबबाड़ी, गुलाबबाड़ी परिसर में ही इमामबाड़ा, रेतिया स्थित बनीखानम का मकबरा अपनी खूबसूरत आभा दूर से ही बिखेर रहा है। नाका के पास बहू-बेगम का मकबरा है जिसकी छत से समूचा शहर देखा जा सकता है। नवाब शुजाउदैला की पत्नी उनमातुज्जोहरा बानो बेगम ने अपने जीवन-काल में ही इसकी तामीर शुरू करा दी थी लेकिन पूरा होने के पहले ही उनका इंतकाल हो गया है।

उनके वजीर दराब अली खां ने इसे पूरा कराया। मकबरे के  स्थापत्य शैली की शानदार विशेषता है कि भीषण गर्मी में भी यहां शीतलता का अनुभव होता है। मकबरे के  बाहरी दीवार से सटी दुकाने इसके सौंदर्य पर धब्बा जैसी लगती है। और तो और यहां पर एक राजनीतिक दल का कार्यालय भी खुल गया है। परिसर में अंदर साफ-सफाई की व्यवस्था भी बहदाल है।
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 नवाब शुजाउद्दौला के सपनों की खूबसूरत उड़ान गुलाबबाड़ी है। गुलाबबाड़ी में नवाब शुजाउद्दौला की कब्र है। मुख्य इमारत के परिसर में प्रवेश करते ही दाहिने ओर इमामबाड़ा है जो अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। इसे देखकर ऐसा लगता है कि इसके रख-रखाव के उचित इंतजाम नहीं किए गए, जबकि लखनऊ का चर्चित इमामबाड़ा यहां के स्थापत्य शैली का ही विस्तार है। नवाबी परिवार से ही जुड़ी एक महिला के नाम पर रेतिया स्थित आकाशवाणी के पास बनीखानम का मकबरा है। यह इमारत बहू-बेगम मकबरा और गुलाबबाड़ी के मुकाबले ज्यादा उपेक्षित दिखती है। 

ये हैं संरक्षित इमारतें...
1- नाका स्थित बहूबेगम का मकबरा
2-रीडगंज स्थित गुलाबबाड़ी
3-बेनीगंज स्थित बड़ी बुआ यतीमखाना
4- रेतिया स्थित बनीखानम मकबरा
4-अयोध्या स्थित सुग्रीव पर्वत, मणि पर्वत, अधिगृहीत परिसर स्थित कुबेर पर्वत

सभी धर्मों का मेल है अयोध्या
अयोध्या सप्तपुरियों में एक है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्य कौन नहीं रींझा। सिखों का पवित्र ब्रह्मकुंड है। मस्लिमों के हजरत नूंह का रिश्ता यही से बताया जाता है। शीश पैगंबर की मजार है। जैन धर्म के छह तीर्थांकरों की जन्मभूमि है। बौद्ध दार्शनिक अश्वघोष यहीं पैदा हुए। महात्मा बुद्ध ने कई चतुर्मास यहां किए। रामजन्मभूमि है, हनुमानगढ़ी है, कनक भवन है, दशरथ महल है, अशर्फी भवन है। न जाने कितने ऐसे स्थल है जों अपने में सदियों का इतिहास समेटे हुए है।

पुरातत्व विभाग के  अफसर डीके जायसवाल ने कहा कि अभी तो सिर्फ गुलाबबाड़ी की बुर्जी की मरम्मत की जा रही है जो कि अप्रैल माह होने के कारण रुक गया है। कहा कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा जाता है, धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए विभाग सतर्क है। 
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ये काम हो तो आकर्षित हो पर्यटक
- चौक घंटाघर के दिनेश कुमार ने कहा कि दरा की मरम्मत होनी चाहिए लेकिन यह जर्जर हो चुका है। मरम्मत होने पर चौक की खूबसूरती बढ़ जाती।
- गुलाबबाड़ी के पास के मो. शफीक ने कहा कि गुलाबबाड़ी का मरम्मत कार्य शुरू तो हुआ लेकिन बगैर पूरा हुए ही रुक गया।
- मकबरा के पास के इफ्तिहार अहमद ने कहा कि मकबरा में चारो ओर झाड़-झंखाड़ है, इसे बगीचे का रूप दे दिया जाए तो पयर्टक आकर्षित होंगे।
- सोहावल निवासी गुड्डू ने गुलाबबाड़ी की खाली जमीन की ओर इशार करते हुए कहा कि यदि यहां पौधरोपड़ हो जाता तो कितना अच्छा रहता
- सहादतगंज निवासी जमुना प्रसाद ने कहा कि रखरखाव पर ध्यान दिया जाता तो गुलाबबाड़ी और ज्यादा निखर जाती। गंदगी भी जगह-जगह फैली हुई है। 
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