अयोध्या। राममंदिर की पहली मंजिल 10 फीट ऊंचाई तक बन गई है, इसकी कुल ऊंचाई 20 फीट होगी। ये जानकारी राममंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान दी। शनिवार को हुइ बैठक में मंदिर को सजाने के लिए किन-किन आधुनिक तकनीक का प्रयोग होगा इस पर भी मंथन हुआ।
राममंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र ने सबसे पहले सुबह नौ बजे रामजन्मभूमि परिसर पहुंचकर मंदिर निर्माण के लिए चल रहे कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया। कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों ने कार्यस्थल पर ही मानचित्रों के माध्यम से बहुत ही बारीकी से प्रगति को समझाया। इसके बाद एलएंडटी के ऑफिस में दोपहर बैठक शुरू हुई जो देर शाम तक चलती रही।
बैठक के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि पहले दिन निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई है। बताया कि जल्द ही परकोटे का निर्माण शुरू करा दिया जाएगा। इसके लिए परकोटा निर्माण स्थल पर खोदाई एवं जमीन समतलीकरण का काम शुरू हो चुका है। बताया कि परकोटे के अंदर और परिक्रमा मार्ग पर चित्रावली बननी है। चित्रावली बनाने के लिए आइकनोग्राफी तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, इस पर सहमति बन गई है। झरोखे भी तैयार होने हैं।
मंदिर के ट्रस्टी डॉ.अनिल मिश्र ने बताया कि मंदिर के दरवाजे, चौखट, बाजू के निर्माण पर चर्चा हुई। इसको लेकर सहमति बन गई है कि महाराष्ट्र के टीक वुड यानि की सौगान की लकड़ियों से मंदिर के दरवाजे आदि बनाए जाएंगे। फारेस्ट रिसर्च इंस्टीटयूट द्वारा सागौन की लकड़ी का सुझाव दिया गया था। महाराष्ट्र के फॉरेस्ट आफिसर से बात हुई। लकड़ी का सर्वे भी किया जा चुका है। विचार हो रहा है कि दरवाजे सीधे महाराष्ट्र से ही बनकर आएं।
उन्होंने बताया कि तीर्थयात्री सुविधा केंद्र का भी निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। बैठक में राममंदिर ट्रस्ट के सदस्य बिमलेद्र मोहन प्रताप मिश्र, डॉ.अनिल मिश्र, मंदिर निर्माण के प्रभारी गोपाल सहित राममंदिर के आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा व एलएंडटी, टाटा व ट्रस्ट के इंजीनियर मौजूद रहे।
रामजन्मभूमि परिसर में लग रहा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि मंदिर में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। मंदिर की प्रकाश व्यवस्था कैसी होगी इस पर चर्चा हुई है। बताया कि मंदिर में 24 घंटे रामधुन गूंजती रहे इसकी योजना है। बिजली के तार कम दिखे और प्रकाश व्यवस्था अव्वल हो, इस पर भी मंथन हुआ। बताया कि हमारी योजना है कि मंदिर परिसर से एक बूंद पानी भी बाहर नहीं जाए, इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का काम भी शुरू हो चुका है।
अप्रैल से फर्श में लगने लगेगा मकराना संगमरमर
चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह की फर्श मकराना के संगमरमर से सजेगी। मकराना के संगमरमर की आपूर्ति भी तेजी से हो रही है। मकराना का संगमरमर 35. मिमी मोटा होगा। इसमें नक्काशी भी की जाएगी जो 15 मिमी गहराई में होगी। चंपत राय ने बताया कि अप्रैल से फर्श में मकराना संगमरमर बिछाने व संगमरमर पर नक्काशी का काम शुरू हो जाने की संभावना है।