शुक्रवार को दोपहर के 12.50 बजे का समय था। कचहरी में टाइपिस्ट अपनी मशीनों पर टाइप करने में मशगूल थे। वादकारी मुकदमों की पुकार सुनने और अधिवक्ता अपने मुकदमे की तैयारी में व्यस्त थे। इसी बीच कचहरी के संघ भवन के सामने अचानक सिलसिलेवार धमाके की आवाज से भगदड़ मच गई। कुछ सड़क पर गिरे तो कुछ जीने से गिरकर चोटिल हो गए।
कुछ देर बाद जब विस्फोट शांत हुआ तो पता चला कि कोई अधिवक्ता पाक अधिकृत कश्मीर में हुए सेना के सर्जिकल ऑपरेशन की खुशी में पटाखे फोड़ रहा था। अधिवक्ता संघ में आराम फरमा रहे कुछ वकील कुर्सी से गिरकर घायल हो गए। बार कैंटीन से लेकर अदालतों तक वकील व वादकारी भागते नजर आए।
आमदिनों की तरह शांत रहने वाली कचहरी में कुछ ही क्षण में अफरातफरी मच गई। वर्ष 2007 में कचहरी में सिलसिले वार बम धमाकों में चार लोगों की मौत हो गई थी। दो दर्जन लोग घायल हो गए थे। तभी से कचहरी की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
बगैर चेकिंग के कोई अधिवक्ता, वादकारी अंदर नहीं घुस सकता। इस समय तो वैसे भी प्रदेश में हाई एलर्ट है। ऐसी दशा में पटाखों का जखीरा लेकर कचहरी में घुसकर उसे फोड़ देना सुरक्षा मेें भारी कमी के नजरिए से देखा जा रहा है। सवाल भी उठना लाजिमी है कि पटाखे वहां तक कैसे पहुंचे।