आग उगल रहे सूरज की तपिश से हर कोई बेहाल है। गुरुवार को पारा थोड़ा कमजोर जरूर दिखा, मगर 11 बजते ही सड़कों-बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। बृहस्पतिवार को भी चौक में भीड़ नदारद दिखी। यात्रा करने वाले व रोज कमाने-खाने वाले सबसे अधिक परेशान रहे।
जिला अस्पताल समेत सीएचसी-पीएचसी में संक्रामक रोगियों की कतारें लग रही है। इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा एक से 8 तक पढ़ रहे सवा लाख बच्चों को शुक्रवार को पढ़कर राहत मिल जाएगी। ग्रीमाष्वकाश घोषित होगा। भीषण गर्मी में पूरे दिन घर से बाहर निकलना मुश्किलों से भरा रहा।
तेज धूप के चलते दोपहर में शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा। बावजूद इसके परिषद के स्कूल खुले रहे और बच्चे कक्षाओं से लकर सड़कों पर गर्मी से बेहाल दिखे। आग उगलता सूरज और तपती धरती फिर भी मजबूरी में मासूमों को स्कूल जाना पड़ रहा है। उधर, जिला अस्पताल में संक्रामक पीड़ित बच्चों की तादात गुरुवार को दिखी।
जबकि बीकापुर में भीषण गर्मी व उमस से लोगों में उल्टी-दस्त का प्रकोप तेज हो गया है। सीएचसी बीकापुर में करीब दो दर्जन मरीज रोज पहुंच रहे हैं। गुरुवार को पातुपुर की रम्भा देवी, ओहरपुर की गायत्री देवी, बीकापुर की नीलम परुवा, ममता मिश्र, कटारी की अर्चना, गोपालपुर की आशा देवी, चर्क्सेंपुर के मो. रजा सहित एक दर्जन से अधिक मरीजों को भर्ती कराया गया है।
इसके एक दिन पूर्व बुधवार को भी लगभग डेढ़ दर्जन मरीज उल्टी-दस्त की शिकायत होने पर सीएचसी में भर्ती हुए थे। इमरजेंसी के डॉ. सतीश चंद्रा ने बताया कि मरीजों को ग्लूकोज की बोतल के अलावा ओआरएस पाउडर व एंटी बायटिक दवायें दी जा रही हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी डॉ. डीके वर्मा ने बताया की तापमान बढ़ने से मरीजों की संख्या बढ़ी है। धूप से बचाव व चीनी-पानी-नमक का घोल ही बचाव का प्राथमिक उपचार है।