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विशेष ऑफरों से लुभा रहीं फाइनेंस कंपनियां

Fri, 06 Nov 2015 11:44 PM IST
फैजाबाद/अमरउजाला ब्यूरो
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सरकारी और गैर सरकारी कर्मचारियों का रुझान तो सरकारी बैंकों की ओर है लेकिन इस वर्ग को छोड़ अन्य लोग प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों को ज्यादा वरीयता दे रहे है। प्राइवेट फाइनेंस कंपनी ग्राहकों से सिर्फ  निर्वाचन कार्ड, खतौनी और पैन कार्ड ही जमा करा रही है जबकि सरकारी बैंकों में कागजी औपचारिकताएं ज्यादा है।
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प्राइवेट फाइनेंस कंपनियां लुभावने आफर तो दे रही है लेकिन ग्राहकों के लिए कई टर्म एंड कंडीशन है। महेंद्रा एंड महेंद्रा फाइनेंस में 6.25 प्रतिशत ब्याज की दर से लोन दिए जाने की चर्चा आम है। यह दीपावली आफर जैसा ही है। लेकिन 6.25 प्रतिशत उसे ही ब्याज देना होगा जो या तो कारपोरेट कर्मचारी हों या केंद्र सरकार व राज्य सरकार का कर्मी हों। इसके अलावा अन्य के लिए ब्याज दर ऊंची है।

गाड़ी की कीमत का जो 60 प्रतिशत लोन लेगा उससे 7.25 फीसदी ब्याज देना होगा। जो पहली बार वाहन खरीद रहा है नगद में किश्तों में भुगतान करेगा, उससे सालाना 8.50 प्रतिशत ब्याज देना होगा। महेंद्रा एंड महेंद्रा के फाइनेंस एक्जीक्यूटिव मनोज सिंह ने बताया कि अभी तक 45 गाड़ियों के  लिए लोन की सुविधा दी गई है जिसमें सभी वर्गों के लोग हैं।
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एचडीएफसी, श्रीराम फाइनेंस, मैग्मा आदि सभी प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों में कमोबेश ऐसी ही स्थिति है लेकिन ब्याज दर के मामले में महेंद्रा एंड महेंद्रा ग्राहकों को ज्यादा लुभा रही है। स्टेट बैंक और पीएनबी आदि में ब्याज दर तो ऊंची है बावजूद इसके सरकारी कर्मचारी इन्हीं पर ज्यादा भरोसा करते हैं।

इसके पीछे प्रमुख कारण कि यहां पर कुछ भी है वह सामने है, छिपा जैसा नहीं रहता है। देवकाली निवासी शिक्षक शिवाजी सिंह ने वाहन खरीदने के लिए लोन ले रहे हैं लेकिन वह सरकारी बैंकों से ही समझ-बूझ रहे हैं। जबकि धनीराम का पुरवा के आलोक द्विवेदी सरकारी कर्मचारी नहीं हैं तो वह प्राइवेट फाइनेंस कंपनी से लोन लेने को प्राथमिकता दे रहे हैं। आलोक ने कहा कि निजी फाइनेंस कंपनियों में औपचारिकताएं कम हैं, इसलिए तरजीह दे रहा हूं।

ग्राहक लोन कराते समय बरतें सावधानी
प्राइवेट फाइनेंस कंपनियों से लोन की सुविधा लेते वक्त ग्राहकों को कई चीजों को लेकर सावधानी बरतनी चाहिए जिससे कि वे बाद में परेशान न हों। कंपनी को जो भी चेक दें, वह एकाउंट पेई चेक ही दें, जिससे कि बाद में ग्राहक के पास सबूत हो कि उसके चेक को किस खाते में भुनाया गया। इसके अलावा फाइनेंस कराते समय ग्राहक यह कन्फर्म कर लें कि कितने समय का फाइनेंस हुआ है और उसी हिसाब से एकाउंट पेई चेक दें। जो कागज बहुत जरूरी हो, उसी को दें।
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