महिला अस्पताल में सामान्य प्रसव पर मरीजों से साढ़े तीन हजार और सीजेरियन ऑपरेशन के लिए पांच हजार रुपये वसूलने की शिकायत मरीजों ने की। जिला अस्पताल में भी खामियां नजर आई।
बालरोग विशेषज्ञ अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिल खोल कर बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। इस पर डॉ. सेठी ने नाराजगी जताई।
बुधवार को अंधता निवारण समिति की समीक्षा करने आए मुख्य मंत्री के ओएसडी ने जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। सर्जिकल वार्ड में बेड पर चादरें नहीं होने पर नाराजगी जताई।
इस वार्ड में तीन मरीजों से मुलाकात कर उनका दुख-दर्द जाना है। पूछने पर मरीजों ने कहा कि दवा अंदर से मिल रही है, लेकिन बच्चा वार्ड में पहुंचते सारी पोल पट्टी खुल गई।
वार्ड आशीष यादव (8 माह) पुत्र संतोष निवासी अयोध्या को डायरिया हुआ है। बच्चों को चिकित्सक ने इस मरीज को सारी दवाएं बाहर से लिख दी।
तारुन बाजार निवासी रामजतन का पांच वर्षीय पुत्री प्रियांशी को तीन दिनों से बुखार नहीं जा रहा है। बच्ची को सोमवार को जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र यति ने बच्चे के परिवारीजनों से बाहर से दवाएं मंगवाई।
प्रियांशी का पिता रामजतन ओएसी के सामने रोने लगा। कहा कि साहब मेरी बेटी को बचा लीजिए। अब मेरे पास पैसा नहीं कि बाहर से दवा मंगा पाए। बच्चा वार्ड में एक दो नहीं, बल्कि चार-चार मरीजों ने बाहर से दवाएं मंगाने की शिकायत की।
अस्पताल के अंदर घुसते ही राखी मौर्या (23) पत्नी अवध किशोर मौर्य सामान्य प्रसव के लिए साढ़े तीन हजार रुपये घूस मांगने का आरोप लगाया। श्री मौर्य का आरोप है कि अस्पताल के एक चिकित्सक ने आपरेशन के लिए पांच हजार रुपये की डिमांड की थी।
पीड़ित का कहना है कि चिकित्सक ने साफ तौर पर कहा था कि पांच हजार रुपये दीजिए तो मां-बच्चा सुरक्षित मिलेगा। रुपया नहीं था तो बच्चा मर गया।
अस्पताल के एक मरीज ने पैथोलॉजी में भी जांच के नाम पर तीन सौ रुपये घूस लेने का आरोप लगाया। निरीक्षण के बाद जिला अस्पताल में पीपल के दो पौध रोपड़ किया और फिर महिला अस्पताल का जायजा लेने के गए तो वहां की स्थिति और ही भयावह मिली।
अस्पताल परिसर में बेतरतीब वाहन खड़े रखे मुख्यमंत्री के ओएसडी भी इसी में पांच मिनट तक फंस गए।
इस मौके पर अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. छैल विहारी, डॉ. एके सिंह, प्रमुख अधीक्षक डॉ. एसी त्रिपाठी, डॉ. नानक सरन, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीरजामाला मौजूद रहीं।