अयोध्या शोध संस्थान के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला शिविर का शुक्रवार को तुलसी स्मारक भवन में शुभारंभ हुआ। शहरी विकास मंत्रालय भारत सरकार के अपर सचिव दुर्गाशंकर मिश्र ने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
समारोह को संबोधित करते हुए श्रीमिश्र ने कहा कि कला भी एक शोध है। कला का कोई अंत नहीं है। कला के दो रूप हैं। एक बनाने वाला और दूसरा देखने वाला। उन्होंने भगवान राम की महिमा का बखान करते हुए कहा कि भगवान राम के विभिन्न आयामों का यहां शोध हुआ है। यह अद्भुत अनुभव है। भगवान राम राजा नहीं थे, वह हमारी संस्कृति के प्रतीक हैं।
इसीलिए उन्हें मर्यादा पुरुषत्तम कहा गया है। वह मर्यादा का अंतिम रूप हैं। हम एक नहीं अनेक हैं। इस बात को उन्होंने बताया। हम सब छोटे-छोटे आयामों में जीते हैं। भगवान राम और भगवान गणेश पूरी दुनिया में विद्यमान हैं, जिस देश में जाइए दो लोगों का रूप जरूर दिखते हैं। हर काल व रूप में राम हुए हैं।
शोध संस्थान के निदेशक डॉ. वाईपी सिंह ने बताया कि 25 से 29 तक आयोजित पांच दिवसीय राष्ट्रीय चित्रकला शिविर में दिल्ली से एमके पुरी, विनय शर्मा जयपुर, डगलस जान मुंबई, राजेंद्र प्रसाद लखनऊ, शिवा बालन चेन्नई, राकेश कुमार मेहरोत्रा श्रीनगर, दीप्ती घोष तस्तीदार कोलकाता, अर्पणा अनिल भोपाल, मिलन दास पटना, शार्दुल कदम मुंबई, हेलेन बाला ब्रह्मा भुवनेश्वर, दिलीप तामुली गुवाहाटी, राहुल मुखर्जी बड़ौदा, उपेंद्र सिंह कानपुर, अवधेश मिश्र लखनऊ, डॉ. राजेश कुमार व्यास कला समीक्षक जयपुर शामिल हो रहे हैं।
शिविर के संयोजक डॉ. अवधेश मिश्र ने बताया कि 28 मार्च तक सिविल लाइंस स्थित एक होटल में सभी चित्रकार चित्र बनाएंगे। 29 मार्च को इनके द्वारा निर्मित चित्रों की प्रदर्शनी संस्थान में लगाई जाएगी।