अयोध्या। हरितालिका तीज शुक्रवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और शिव परिवार की पूजा अर्चना की।
शिव-गौरा की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर श्रृंगार पूजन कर कथा सुनी। सुहागिन महिलाओं ने अपने अखंड सौभाग्य तो कुंवारी लड़कियों ने मनचाहे पति की प्राप्ति की कामना हेतु व्रत रखा। हरितालिका तीज पर अनेक महिलाओं ने अपने घरों में शिव-पार्वती की कच्ची मूर्ति स्थापित कर पूजा-अर्चना की। पूजन उपरांत हरितालिका तीज व्रत कथा पढ़ी।
हरितालिका तीज पर्व पर रामनगरी में सरयू स्नान का सिलसिला भी चला। व्रती महिलाओं ने सरयू में डुबकी लगाई और पूजन अर्चन किया। मान्यता है कि पापों और सांसारिक तापों को हरने वाले इस व्रत को जो महिलाएं विधिपूर्वक करती हैं उसके सौभाग्य की रक्षा भगवान शिव पार्वती स्वंय करते हैं। इस व्रत को सर्वप्रथम माता पार्वती ने स्वंय किया था।
उनके तप और आराधना से खुश होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी बनाया था। इसी मान्यता के चलते व्रती महिलाओं ने शिव मंदिरों नागेश्वरनाथ, क्षीरेश्वरनाथ आदि में भोलेनाथ का जलाभिषेक एवं दुग्धाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।
वहीं कोरोना के चलते इस बार वर्षों की परंपरा भी उस समय टूट गई जब साकेत महाविद्यालय के सामने चुटकी देवी मंदिर पर हरितालिका तीज व्रत पर लगने वाला मेला नहीं लगा न ही मां की झांकी सजाई गई।
केवल पूजन-अर्चन कर परंपरा का निवर्हन किया गया। मेले के आयोजक वीरेश श्रीवास्तव ने बताया कि इस वर्ष कोरोना की गाइडलाइन को देखते हुए चुटकी देवी पर मेले का आयोजन नहीं किया गया है न ही मां की झांकी सजाई गई। सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है। बताया कि सुबह चुटकी देवी मंदिर में मां की पूजा अर्चना की गई, सायंकाल महाआरती का आयोजन किया गया।