अयोध्या। सरयू के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का क्रम जारी है। शुक्रवार को एक बार फिर सरयू के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। बाढ़ की विभीषिका से जिले के 12 गांवों के 1940 परिवार प्रभावित हैं। इन गांवों की करीब दस हजार की आबादी बाढ़ का दंश झेलने को विवश है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सैकड़ों बीघा खेती पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। सरयू अभी भी लाल निशान से 76 सेमी. ऊपर बह रही है। बाढ़ पीड़ित लोग मचान बनाकर समय बीता रहे हैं। वहीं चूल्हे के लिए रखी लकड़ियां गीली होने से अब भोजन पकाने में परेशानी आ रही है। लोग प्रशासन की ओर से मिले लइया-चना खाकर किसी तरह जीने को विवश हैं।
जनपद में बाढ़ की विनाश लीला जारी है। गुरुवार को दिनभर सरयू में उफान थमा रहा लेकिन शुक्रवार को पुन: जलस्तर में बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुक्रवार को नदी के जलस्तर में पांच सेमी. की वृद्धि दर्ज की गई। शुक्रवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 93.49 मीटर रिकॉर्ड किया गया,जो लाल निशान 92.73 मीटर से 76 सेमी. ऊपर है।
वहीं सरयू में आई बाढ़ के चलते तटीय इलाकों में बसें लोग बेहाल हैं। पूरा बाजार के मूडाडिहा में लगभग 194, बलुईया में 200 व सेवराहवा में लगभग 50 परिवारों के घरों में चारों तरफ से पानी भर गया है। अधिकतर घरों में बाढ़ पीड़ित मचान बनाकर या फिर तख्त पर अपना जीवन बिता रहे हैं।
रुदौली तहसील क्षेत्र के नैपुरा, मुतौली, संडरी, पसैया, उधरौरा सहित दर्जनों गांवों में बरसात के पानी की जलनिकासी न होने के चलते बाढ़ से हालात बने हुए हैं। ग्रामीणों ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि हजारों रुपये लागत लगाकर धान व गन्ने की फसल लगाई थी, लेकिन सब बर्बाद हो गई। सभी घरों में पानी भरा हुआ है।
आने जाने के लिए एक मात्र सीसी रोड पर भी जलभराव होने से काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। एडीएम वित्त एवं राजस्व जीएल शुक्ल ने बताया कि सदर, सोहावल व रुदौली तहसील के कुल 12 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित को राशन किट, मिट्टी का तेल, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराया जा रहा है।
बाढ़ राहत कैंपों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगाई गई हैं। बाढ़ के पानी में डूबे गांवों में आवागमन के लिए 35 नावें लगाई गई हैं। राजस्व व प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं, बाढ़ प्रभावित इलाकों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग की जा रही है।