अयोध्या। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण की प्रक्रिया भूमि पूजन के साथ ही शुरू हो गयी है। वहीं दूसरी तरफ वैष्णव नगरी में सौ साल पुराने पुरातात्विक मंदिरों को भी भव्यता देने की तैयारी है। अब रामनगरी के इन प्राचीन मंदिरों की दिव्यता-भव्यता लौटेगी। इसके लिए अयोध्या के प्राचीन मंदिरों का सर्वे भी शुरू हो चुका है। करीब 100 प्राचीन मंदिरों की सूची तैयार की जा रही है, इसके बाद इनके जीर्णोद्घार के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। पहले चरण में 60 मंदिरों की सूची तैयार कर शासन को भेजी जा चुकी है।
रामनगरी को मंदिरों का शहर कहा जाता है, यहां करीब दस हजार मंदिर हैं। कई मंदिर ऐसे हैं जो अति प्राचीन हो चुके हैं और रखरखाव के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं। अधिकांश मंदिरो को लेकर कोई न कोई मान्यता जुड़ी हैं तो कुछ रामयुग के भी गवाह हैं। सरकार अयोध्या की धरोहर ऐसे प्राचीन मंदिरों का सर्वे करा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग और अयोध्या शोध संस्थान मिलकर ऐतिहासिक तथा पुरातात्विक महत्व वाले मंदिरों की एक सूची तैयार कर रहा है।
इन मंदिरों के धार्मिक महत्व से जुड़े दस्तावेज भी तैयार किए जा रहे हैं। प्रथम चरण में सरयू तट के किनारे स्थित स्वर्गद्वार मोहल्ले के प्राचीन मंदिरों की सूची तैयार कराई गई है। ऐसे 60 मंदिरों को चिह्नित किया गया है जो जर्जर हो चुके हैं और रामनगरी की प्राचीनता के गवाह हैं, इनकी सूची शासन को भेजी जा चुकी है। नगर निगम अयोध्या ने भी रामनगरी के 178 जर्जर मंदिरों की सूची तैयार कराई थी। जिसमें स्वर्गद्वार मोहल्ले में ही सर्वाधिक 22 प्राचीन मंदिर जर्जर हालत में पाए गए हैं। इनमें कई मंदिरों का इतिहास दो सौ वर्षों से लेकर पांच सौ वर्षों तक का है।
रामनगरी के स्वर्गद्वार मोहल्ले में सर्वाधिक प्राचीन मंदिर हैं। स्वर्गद्वार में ही सिद्घपीठ नागेश्वरनाथ, कालेराम मंदिर, चंद्रहरि महादेव मंदिर, शेषावतार मंदिर, सहस्रधारा घाट, सरयू मंदिर, हनुमत सदन, हनुमत निवास सहित अन्य सिद्घस्थान हैं जो कि पौराणिक एवं रामायणकालीन माने जाते हैं। मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना भगवान कुश ने की थी। वहीं नागेश्वरनाथ मंदिर के दक्षिण भाग में स्थित प्राचीन कालेराम मंदिर में विक्रमादित्य कालीन मूर्तियां स्थापित हैं। प्राचीन मंदिरों में इस मंदिर का प्रमुख स्थान है।
नागेश्वरनाथ मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधक सभापति तिवारी बताते हैं कि मान्यता है कि नागेश्वरनाथ मंदिर के इर्द-गिर्द चुंबकीय शक्तियों के प्रभाव के कारण ही मानसिक रोगी ठीक हो जाते हैं। इसी मान्यता के कारण बाहर के जिलों से लोग अपने बीमार परिवारीजनों को यहां लाकर छोड़ जाते हैं। बहुत सारे बीमार यहां से ठीक होकर जा चुके हैं। इस स्थान विशेष की खोज के लिए कई प्रयास किए गए लेकिन अभी तक यह चमत्कारिक स्थान खोजा नहीं जा सका है।
पहले चरण में अयोध्या के 60 मंदिरों की सूची तैयार की गई है। इनमें स्वर्गद्वार मोहल्ले के ज्यादा मंदिर है। इनके फोटोग्रॉफ्स व दस्तावेज तैयार कर शासन को भेजे जा चुके हैं। अभी आगे के लिए शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है, शासन से जैसे ही लिखित निर्देश मिलता है, आगे की योजना को मूर्तरूप देने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
रामतीरथ, प्रशासनिक अधिकारी, अयोध्या शोध संस्थान