धान की रोपाई लायक अभी तक बरसात न होने से खेतों में तैयार बेहन बरबाद हो रही है। पंपिंग सेट, निजी नलकूप से रोपाई करने से कतरा रहा है।
ग्रामीण इलाकों में खेत के खेत खाली पड़े हैं। बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से सरकारी नलकूपों के मोटर नहीं घूम पा रहे हैं। कई नलकूप तो विभिन्न दोषों में बंद चल रहे हैं। रोपाई उन्हीं क्षेत्रों में हो रही है, जिनका खुद का पंपिंग सेट है या फिर नहर की सुविधा है।
आमतौर पर किसान खेतों में धान की रोपाई जून के आखिरी से लेकर जुलाई के दूसरे सप्ताह तक करता है। लेकिन इस बार इंद्रदेव ऐसे रूठे कि जून माह से अब तक कहीं तालाब पोखरों में पानी ही नहीं इकट्ठा हुआ।
जुलाई बीतने को है, झमाझम बारिश तो दूर फुहारें भी नहीं गिर रही हैं। पिछले चार दिनों से चटख धूप निकल रही है। धरती की कोख पानी बिना सूनी पड़ी है। खेतों में कब से तैयार खड़ी बेरन के पीले पड़ने से किसानों के चेहरे भी मुरझा गये हैं।
कृषि विश्वविद्यालय, कुमारगंज के मौसम वैज्ञानिक डॉ .अमरनाथ मिश्र कहते हैं कि मानसून तो बंगाल की खाड़ी से ही कमजोर उठा था। यूपी को छोड़ मध्य प्रदेश, गुजरात राजस्थान तक में अच्छी बरसात हो रही है।
जिले में छह अगस्त तक अच्छी बारिश के संकेत नहीं हैं। 31 जुलाई, 02 अगस्त में हल्की-फुल्की 02-03 मिली. वर्षा की उम्मीद है। लेकिन इससे किसानों का कोई भला होता नहीं दिखाई दे रहा है।
जिला कृषि अधिकारी, फैजाबाद डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि अभी जिले में अच्छी बरसात नहीं हुई है। बीच-बीच में कहीं हल्की तो कहीं कुछ तेज वर्षा हुई। तालाब और खेत सूखे हैं।
इसका असर खेतों में धान की रोपाई और पैदावार पर पड़ना शुरू हो गया है। सही मायनों में खेतों को पानी की जरूरत अब बहुत अधिक है।