अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद मामले में नियमित सुनवाई प्रारंभ हो चुकी है। सुनवाई के पहले दिन निर्मोही अखाड़ा ने अपना दावा प्रस्तुत किया है।
हालांकि मामले में फैसला किसके पक्ष में आएगा यह तो समय के गर्भ में हैं। हालांकि छह दिसंबर 1992 की घटना व सुप्रीम कोर्ट के आदेश से भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग की ओर से कराई गई खोदाई के सभी अवशेषों को एएसआई के विशेषज्ञों के संरक्षण में अधिग्रहीत परिसर में ही रखवाया गया है। जबकि राम चबूतरा निर्माण के दौरान की गई खोदाई से मिले अवशेषों को रामकथा संग्रहालय में संरक्षित किया गया है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की ओर से जीपीआर सर्वेक्षण टोजो विकास इंटरनेशनल कंपनी ने किया। फरवरी 2003 की रिपोर्ट में कहा गया कि वहां जमीन के अंदर कुछ इमारतों के 184 भग्नावशेष हैं।
इस रिपोर्ट पर मुकदमे के पक्षकारों की राय सुनने के बाद अदालत ने मार्च 2003 में सिविल प्रोसीजर कोड के तहत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को आदेश दिया कि वह संबंधित विवादित परिसर (केवल उस स्थान को छोड़कर जहां दिसंबर 1992 में विवादित मस्जिद ध्वस्त होने के बाद से तंबू के अंदर भगवान राम की मूर्ति रखी है) की खोदाई करके खोजबीन करे। यह खोदाई दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों, वकीलों की मौजूदगी में हुई।
एएसआई की टीम में भी दोनों समुदायों के 14 पुरातत्व विशेषज्ञ शामिल थे। खोदाई की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी होती रही। फैजाबाद में तैनात दो जज प्रेक्षक के तौर पर उपस्थित रहे। खोदाई 12 मार्च से 7 अगस्त तक हुई।
एएसआई की यह विस्तृत रिपोर्ट और फोटोग्राफ मुकदमे के सभी पक्षों के पास उपलब्ध है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि खोदाई में 13वीं शताब्दी ईसा पूर्व तक के अवशेष मिले हैं। जो खंडहर खोदाई में मिले, उनमें इतिहास के कुषाण और शुंग काल से लेकर गुप्त काल और प्रारंभिक मध्य युग तक के अवशेष हैं।
बताते चलें कि अधिग्रहीत परिसर में संरक्षित खोदाई के दौरान निकले अवशेषों की कोर्ट की ओर से नियुक्त पर्यवेक्षकों एवं पक्षकारों की मौजूदगी में एएसआई के पुराविद निगरानी करते हैं। समय-समय पर इनकी जांच की जाती है, रासायनिक लेपन कर इन्हें सुरक्षित किया जाता है। इन सभी पुरावशेषों को अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय में ही संग्रहित कराया गया है।
रामकथा संग्रहालय में संरक्षित हैं ये अवशेष
रामकथा संग्रहालय के आर्ट गैलरी तीन व 2 में रामजन्मभूमि के अवशेषों को संरक्षित रखा गया है, ये सभी अवशेष किसी प्राचीन मंदिर के ही हैं।
संग्रहालय में रामजन्मभूमि से संबंधित संरक्षित वस्तुओं में शिशु धारिणी माता, कुबेर प्रतिमा, उमा-महेश्वर की खंडित प्रतिमा, वेलनाकार वस्तु, वरद मुद्रा में दाया हाथ, वेलन, विष्णु पट्ट का भागव, प्याला, नंदी की मूर्ति व मिट्टी के पात्र हैं। जबकि आर्ट गैलरी नंबर तीन में खोदाई के दौरान मिले बड़े-बड़े प्रस्तर खंड व शिखर के नीचे लगने वाला आमालक आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।