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कई तालाबों का वजूद मिटा

Sun, 08 May 2016 10:59 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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अयोध्या में अतिक्रमण से घिरा पौराणिक सप्तसागर। - फोटो : अमर उजाला
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जिले में शहर से देहात तक कई दर्जन तालाबों पर अतिक्रमण करके घर मकान बना लिए गए। शहर में जमीनें महंगी होने के साथ कई का अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है। शिकायतों पर कार्रवाई शुरू होती है लेकिन कभी सियासी रसूख तो कभी भूमाफिया की कारस्तानी इसे रोकवाने में कामयाब हो जाती है। नए सिरे से तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कोशिश है। बारिश में तालाबों के रीचार्ज के लिए प्रशासन ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है।  
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जिले की पांच तहसीलों में 12 हजार से भी ज्यादा तालाब और शहर में दो सैकड़ा से ज्यादा छोटे-बड़े पार्क बताए जाते हैं लेकिन आबादी बढ़ने के साथ इन पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। हालांकि न्यायालय से फैसले और समय-समय प्रशासन से अभियान ने अतिक्रमण की बढ़ती गति को बाधित जरूर किया है लेकिन अतिक्रमण मुक्ति के लिए अभी प्रयास शेष हैं।

जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों पर घर मकान बनाकर अवैध कब्जे की स्थिति अकेले बीकापुर से देखी जा सकती है। बीकापुर प्रतिनिधि के मुताबिक राजस्व अभिलेखों में कुल 3701 तालाब हैं। इसमें 56 तालाब अतिक्रमण की चपेट में है।
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बीकापुर विकासखंड में 1466 तालाबों में 21, तारून विकासखंड में 1726 तालाबों में 28 चपेट में है। हैरिंग्टनगंज विकासखंड के 519 तालाबों में सात अतिक्रमित तालाबों के रूप में चिह्नित किए गए हैं। इसी तरह दूसरी तहसीलों की स्थिति है।

सरकारी स्तर पर ढाई से तीन सौ तालाबों पर अतिक्रमण हैं। शहरी क्षेत्र में तालाबों का अस्तित्व खतरे में हैं। यह तो सरकारी आकंड़े हैं लेकिन वास्तव में तस्वीर इससे भी खराब है। तालाबों को रीचार्ज करने के लिए मनरेगा के माडल तालाबों में पानी आने की व्यवस्था के साथ ही तालाब-पोखरों के साथ शहर के कुओं की सफाई के लिए प्रशासन ने निर्देश दिया है।
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