पंचायत चुनाव में शायद यह पहला मौका है जब ग्रामीणों को ग्राम पंचायत सदस्य पद की कोई अहमियत नहीं दिखी। गांव की सरकार में सदस्यों की उपेक्षा का परिणाम रहा कि करीब दो हजार सीटों पर किसी ने नामांकन ही नहीं किया।
आधे से ज्यादा सीटों पर केवल एक प्रत्याशी ने नामांकन किया। अब खाली सीटें भरने के लिए उपचुनाव कराया जाएगा। अतीत में ग्राम पंचायत में सदस्यों की खासी अहमियत होती थी।
गत दो चुनावों से ग्राम पंचायत की तस्वीर खासी बदली है। कई चुने ग्राम पंचायत सदस्यों के प्रधान का रबर स्टैंप बनने से कभी भी बैठक करके हस्ताक्षर कराए जाने की परंपरा बन गई।
प्रधान के प्रति अविश्वास प्रस्ताव के नियमों में भी बदलाव के कारण के उनकी अहमियत और कम हो गई। यही कारण है कि प्रधान पद के लिए मारामारी के दौरान सदस्य पद पर ग्रामीणों का आकर्षण इस कदर कम हुआ कि अब कोई नामांकन करने को भी तैयार नहीं रहा।
पंचायत चुनाव के परिणाम के आंकड़े भी कुछ इसी ओर इशारा कर रहे हैं। जिले में ग्राम पंचायत सदस्य पद के पदों की संख्या 10555 है। इनमें गत चुनाव के दौरान लगभग सवा सात हजार सीटों पर ही नामांकन दाखिल हुए।
नाम वापसी के बाद 5018 सीटों पर एकल प्रत्याशी के होने के चलते उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। महज 2199 सीटों पर चुनाव हुआ। 2057 सीटें खाली रह गईं। अब खाली सीटों पर अगले छह महीने में नए सिरे से चुनाव कराए जाने की व्यवस्था होगी।