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पहली बार मोबाइल एप से होगी आर्थिक जनगणना

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अयोध्या। देश में पहली बार पेपरलेस डिजिटल तौर तरीकों से आर्थिक जनगणना होगी, जिसे लेकर जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने तैयारियां तेज कर दी है।
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रविवार को मवई चौराहा पर वीएलई (ग्रामीण स्तरीय उद्यमी) के साथ बैठक करके इसकी जिम्मेदारी कॉमन सर्विस सेंटर, जनसेवा केंद्र संचालकों और उनके कर्मचारियों को सौंपी गई है। इससे जिले में करीब 25 सौ से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा।
सीएससी के जिला प्रबंधक प्रदीप सिंह व जाहिदुल्ला ने बताया कि तिथि की घोषणा होते ही मोबाइल एप के साथ सर्वेक्षण कर्मी घर-घर पहुंचेंगे। इस एप में जो भी डाटा फीड होगा वह सीधे सांख्यिकी मंत्रालय के पोर्टल पर जाएगा।
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इसके लिए सर्वप्रथम रुदौली ब्लॉक में सोमवार को ब्लाक सभागार में प्रशिक्षण शुरू होगा उसके बाद मंगलवार को मवई और बुधवार को सोहावल में सीएससी कर्मियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
इससे पहले वर्ष 2013 में आर्थिक जनगणना हुई है। बताया कि पहले इस काम में परिषदीय स्कूलों के अध्यापकों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा आदि को लगाया जाता था। अबकी बार देश भर की आर्थिक जनगणना का कार्य सीएससी एजेंसी को दिया गया है। एजेंसी अपने जनसेवा केंद्र संचालकों यानी वीएलई के माध्यम से इसे पूरा कराएगी।
जनगणना के तरीके का दिया जाएगा प्रशिक्षण
जनगणना का काम जनसेवा केंद्रों के माध्यम से होगा, लिहाजा केंद्र संचालकों को काम करने का तरीका बताया जाएगा। सीएससी के जिला प्रबंधक ने बताया कि जिले में सभी ग्राम पंचायतों के सीएससी संचालक से ही जनगणना कराई जाएगी।
जन सेवा केंद्र संचालक ने अपने स्तर पर 10 युवाओं को जोड़ चुका है, जो मोबाइल एप लेकर घर-घर जाएंगे और डाटा एकत्रित करेंगे। केंद्र संचालक बतौर सुपरवाइजर उनके काम को क्रास वेरीफाई करेगा।
यह डाटा सीधे संख्यिकी मंत्रालय के पोर्टल पर पहुंचेगा। पहले चरण में रुदौली, मवई व सोहावल के केंद्र संचालकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। बताया कि जिले के 11 ब्लाकों के 835 ग्राम पंचायतों में तैनात ग्राम स्तरीय उद्यमी यानी वीएलई के माध्यम से सातवीं आर्थिक जनगणना की तैयारियां पूर्ण हो चुकी है। 26 अगस्त को रुदौली, 27 को मवई और 28 को सोहावल ब्लाक सभागार में प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा।
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ऐसे होगी गणना
बताया कि तीन तरीके से यह गणना होगी। पहली में ऐसे घरों की गणना होगी जहां कोई व्यवसायिक गतिविधि नहीं हो रही है। दूसरा उन घरों का सर्वे होगा जहां घर में छोटी छोटी दुकानें खोली गई है और तीसरी व्यवसायिक दुकानों, मॉल, फैक्ट्री आदि व्यवसायिक गतिविधियों वाले स्थान की गणना होगा। बताया कि इस गणना से सरकार को अपनी आर्थिक निर्णय लेने में मदद करती है। देश के कितने लोगों के पास रोजगार है। लोगों की आर्थिक स्थिति के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी।
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