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अस्पतालों में दवा खत्म, सांसत में मरीजों की जान

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अयोध्या। मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण इन दिनों संक्रामक बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। सिर्फ जिला अस्पताल में प्रतिदिन तेज बुखार, बदन दर्द, पेट के अन्य रोग, एंजाइटी, एनीमिया, लीवर, अस्थमा, खांसी, चर्म रोग आदि के मामले अधिक आ रहे हैं। लेकिन इलाज के लिए अस्पताल में दवा का स्टोर रूम खाली सा है। यहां 260 आवश्यक दवाओं के सापेक्ष महज 76 दवाएं ही हैं।
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इन दिनों जिला अस्पताल सहित शहर के सभी प्रमुख अस्पतालों में मरीजों की भरमार है। विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित मरीजों से ओपीडी खचाखच भरा है। प्रतिदिन वायरल बुखार, बदन दर्द, सर्दी, खांसी, उल्टी-दस्त, फोड़ा-फुंसी, एलर्जी, लीवर की समस्या, सांस फूलने सहित विभिन्न रोगियों की संख्या बढ़ी है।
लेकिन इनके इलाज के लिए दवाएं मौजूद नहीं हैं। आलम यह है कि यहां उपलब्ध एक ही प्रकार की दवाएं अधिकांश मरीजों को लिखी जा रही हैं। इससे कुछ मरीज तो ठीक हो रहे हैं, लेकिन आराम न होने पर अगले दिन आकर कुछ मरीज डॉक्टरों से शिकायत कर रहे हैं।
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इन दवाओं का स्टॉक खत्म
2018 में जारी हुए एसंसियल ड्रग लिस्ट के अनुसार अस्पताल में 260 प्रकार की दवाएं होनी चाहिए। जिसके सापेक्ष 90 दवाओं की उपलब्धता सूची जारी की गई थी। इसमें से शुक्रवार को 14 और दवाएं खत्म हो गईं।
जिनमें अल्प्राजोलाम (एंजाइटी की), एथ्रोमाइसिन व सिप्रोफ्लाक्सासिन (एंटीबायोटिक), बिस्कोडिल (पेट की दवा), कैल्शियम, फोलिक एसिड, ओमेप्राजोल (गैस की), जीवन रक्षक, नारफ्लाक्स, आई ड्रॉप, बच्चों के लिए पैरासीटामॉल सीरप, मेट्रोजिल सीरप, अमाक्सीक्लेब (बच्चों के लिए एंटीबायोटिक) व बच्चों के बुखार की दवा शामिल है। इसके अलावा स्ट्राव्ड क्रीम, एंटीबायोटिक क्रीम, केंचुआ, लीवर, गुर्दे की पथरी, दिमाक, सांस फूलने की दवा, अस्थमा, इनहेलर आदि भी मौजूद नहीं हैं।
फायदा न होने पर मरीज मांग रहे बाहर की दवाएं
बीते दिनों जिलाधिकारी के निरीक्षण के उपरांत चिकित्सकों की नकेल कसने के बाद जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने बाहर की दवाएं लिखना बंद कर दिया और ओपीडी में आने वाले सभी मरीजों को अस्पताल में मौजूद दवाएं ही लिखने लगे। इन दवाओं से कुछ को तो आराम मिल जा रहा है, लेकिन अधिकांश को फायदा नहीं हो रहा है। जो अगले दिन फिर अस्पताल पहुंचकर बाहर की दवाएं लिखने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन चिकित्सक प्रशासन के खौफ के कारण ऐसा करने को तैयार नहीं हैं। अब इसको लेकर प्रतिदिन चिकित्सक व मरीजों में नोकझोंक तक की नौबत आ रही है।
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