इससे पूर्व साकेतवासी डॉ. शास्त्री का त्रयोदशाह संस्कार परंपरानुसार हुआ। संत-महंतों व श्रद्धालुओं ने डॉ. विश्वनाथ दास को श्रद्धासुमन अर्पित किया। तत्पश्चात महंताई महोत्सव हुआ।
इसमें महंत नारायणाचारी, महंत दशरथी दास, महंत रामदास, महंत नर्मदा दासी, महंत रामकुमार दास, महंत मनमोहन दास, पुजारी रमेश दास, महंत मिथिला बिहारी दास, महंत रामशंकर दास, महंत दामोदर दास, डा. निर्मल खत्री, डा. बीडी द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
बिहार के मुजफ्फरपुर के गांव रोहुआ राजाराम की रहने वाली डॉ. ममता शास्त्री का जन्म 25 सितंबर 1982 को हुआ। उनके पिता कृष्ण मोरारी प्रसाद हैं।
पूर्व सांसद डॉ. विश्वनाथ दास शास्त्री पांच-छह वर्ष की अवस्था में ही उन्हें शिष्य बनाकर अयोध्या ले आए थे। तभी से वह उनकी शिष्या के रूप में रहकर गुरु व भगवान की सेवा करने के साथ ही शिक्षा प्राप्त किया।
इसके बाद अवध विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान में पीएचडी, मनोविज्ञान से दोहरा एमए, मनोचिकित्सा परामर्श से पीजी डिप्लोमा, डॉ. संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से शास्त्री की उपाधि, डा. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध ग्रामांचल महाविद्यालय बाराबंकी से एलएलबी की शिक्षा ग्रहण की।
दर्शन भवन की महिला महंत डॉ. ममता विवाहित हैं। इनका विवाह 18 नवंबर 2009 में बस्ती जिले के निवासी सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अशोक मिश्र से हुआ है। इनकी दो वर्ष की एक पुत्री वैदेही है। भाई विजय कुमार भी इनके साथ रहकर मंदिर की सेवा करते हैं।