राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज दर्शननगर में 23 अक्तूबर को हुई मरीज की मौत के बाद जांच में दोषी पाए जाने पर कमेटी की अनुशंसा पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। ड्यूटी पर तैनात जूनियर रेजीडेंट चिकित्सक को सेवा से निष्कासित करके मौके पर तैनात तीन स्टाफ नर्सों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही सहायक आचार्य डॉ. विनोद आर्या को चेतावनी दी गई है। विकास खंड पूराबाजार के बैसिंह पूरे पहलवान निवासी कौशलेंद्र सिंह (37) पुत्र इंद्रसेन सिंह के पैर की हड्डी टूटने पर करीब एक माह पूर्व राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के आर्थो वार्ड में भर्ती कराया गया था।
मरीज के पैर का ऑपरेशन भी हुआ था। मरीज 22 अक्तूबर की देर रात बेड से गिर गया। इसके बाद उसकी हालत गंभीर होने लगी। परिजन बार-बार चिकित्सक को बुलाने व आईसीयू में मरीज को शिफ्ट करने की मांग करते रहे। आरोप है कि कोई भी चिकित्सक झांकने नहीं आया। इसी बीच 23 अक्तूबर की दोपहर में मरीज ने दम तोड़ दिया। इस पर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया।
मामला तूल पकड़ने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जांच कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने शुक्रवार को रिपोर्ट सौंपी तो उसमें ड्यूटी पर तैनात एक जेआर, तीन स्टाफ नर्स दोषी करार दी गईं। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में तर्क दिया कि मरीज की स्थिति गंभीर होने पर तत्कालीन ड्यूटी पर तैनात चिकित्साधिकारी व पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा ऑनकॉल विशेषज्ञ चिकित्सक को तत्काल सूचित नहीं किया गया।
आपातकालीन स्थिति होने पर मरीज को आईसीयू में स्थानांतरित नहीं किया गया। चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में इस प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं है। इसलिए सहायक आचार्य विनोद कुमार आर्या को चेतावनी पत्र निर्गत करने, जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर अभिषेक कुमार सिंह को सेवा से निष्कासित करने, स्टाफ नर्स अर्चना तिवारी, दीपमाला सिंह व किरन यादव को सेवा से निलंबित करने की अनुशंसा की गई।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने बताया कि जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर जूनियर रेजीडेंट डॉक्टर को सेवा से निकाल दिया गया है। जबकि, तीन स्टाफ नर्सों को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, सहायक आचार्य को चेतावनी दी गई है। यदि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति हुई तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।