अमानीगंज ब्लॉक के कोठिया गांव में पूर्व प्रधान और सीएचसी अधीक्षक डॉ. अंसार अली की मिलीभगत से तीन आशा बहुओं की फर्जी नियुक्ति कर दी गई। मामला प्रकाश में आया तो वर्तमान प्रधान ने डीएम से शिकायत की।
डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने आशा बहुओं की नियुक्ति की जांच कराई तो नियुक्ति फर्जी पाई गई है। अब तीनों आशा बहुओं की नियुक्ति रद्द कर दी गई। सीएचसी अमानीगंज अंतर्गत गोठिया गांव की आबादी साढ़े छह हजार है। गांव में पहले से ही छह आशा बहुओं की तैनाती है।
शासनादेश के तहत एक हजार की आबादी पर एक आशा बहू की तैनाती की जा सकती है। आबादी के हिसाब से एक और आशा बहू की तैनाती की जा सकती है। वर्ष 2014-15 में पूर्व प्रधान दर्शना देवी ने एक दो नहीं बल्कि तीन आशा बहुओं की नियुक्ति की संस्तुति की और सीएचसी प्रभारी डा. अंसार अली ने तीनों की तैनाती के लिए पत्रावलियां आगे बढ़ा दीं।
उन्होंने यह भी नहीं जानना चाहा कि गांव की आबादी कितनी है और कितनी आशा बहुओं की तैनाती की जा सकती है। आशा बहुओं की तैनाती में मानकों को भी नजरंदाज किया गया है। आशा बहू की नियुक्ति के लिए कम से कम 25 वर्ष की उम्र होना अनिवार्य है।
लेकिन जिन तीन आशा बहुओं की तैनाती की गई उसमें एक की उम्र 22 साल और दूसरे की 20 साल और तीसरे की पत्रावली गायब हो चुकी है। मामला प्रकाश में आने के बाद वर्तमान प्रधान नीलम सिंह ने पूर्व डीएम योगेश्वरराम त्रिपाठी से इसी साल जनवरी में शिकायत की थी।
डीएम ने सीएमओ को मामले की जांच करने का निर्देश दिया था। सीएमओ ने एनआरएचएम के अमित कुमार और एसीएमओ डा. छैल विहारी को संयुक्त रूप से जांच करने का निर्देश दिया था। दोनों अफसरों की जांच रिपोर्ट में तीनों आशा बहुओं की नियुक्ति फर्जी पाई गई। इस पर सीएमओ ने आशा बहुओं की नियुक्ति रद्द कर दी है।