जिला चिकित्सालय का मुख्य द्वार।
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जिले में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का अभिन्न अंग जिला अस्पताल होगा। मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी क्लीनिकल की बारीकियों को जिला अस्पताल में ही सीखेंगे। इसी के मद्देनजर अस्पताल को अपग्रेड किया जा रहा है। समूचे अस्पताल को ई-हॉस्पिटल में तब्दील किया जाएगा। अस्पताल को उच्चीकृत किए जाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
जिले में लगभग ढाई सौ करोड़ की लागत से शहर से सटे गंजा गांव में मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखने के साथ साथ निर्माण शुरू कर दिया गया है। मेडिकल कॉलेज को स्टेबलिश कराने के लिए डायरेक्टर जनरल मेडिकल एजुकेशन स्तर से अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज के प्रचार्य डॉ. पीके सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी के साथ जिला अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का ब्यौरा भी तलब किया गया है। जिला अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल में मानव संसाधान, उनकी योग्यता के साथ-साथ अस्पताल में उपलब्ध उपकरणों के बारे में भी सारी जानकारी शासन को मुहैया करा दी है।
कार्ययोजना के तहत गंजा गांव में मेडिकल कॉलेज का प्रशासनिक भवन होगा। इस केन्द्र पर एमबीबीएस छात्रों के शुरू के दो वर्ष की पढ़ाई की जाएगी। वजह, इस दौरान बच्चों को किसी प्रकार की क्लीनिकल जानकारी नहीं मुहैया कराई जाती है।
इसके अलावा दर्शननगर स्थित मंडलीय चिकित्सालय और जिला अस्पताल में क्लीनिकल की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को स्थानान्तरित किया जाएगा। इन्हीं चिकित्सालयों में मेडिकल छात्रों को मरीजों के इलाज की बारीकियां सिखाई जाएंगी। जिला अस्पताल प्रशासन मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को पोस्टमार्टम से लेकर इलाज तक की बारीकियों की जानकारी मुहैया कराएगा।
इसी के तहत अस्पताल की भर्ती पंजिका को पूरी तरह से बदल दिया गया है। अब अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की भर्ती पंजिका 27 पेज की बनाई गई है, जो मेडिकल कालेज के फार्मेट पर पूरी तरह से तैयार किया गया है। और तो और अस्पताल में मरीजों का पर्चा कम्प्यूटराइज बनाया जाएगा। इसके लिए छह काउंटर भी खेले जाएंगे।