ज्येष्ठ मास के तीसरे मंगलवार पर रामनगरी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। सरयू तट से प्रमुख मंदिरों तक दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं। प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शनार्थियों की खासी भीड़ भोर से देर रात तक बनी रही।
शहर के नाका हनुमानगढ़ी और रिकाबगंज हनुमानगढ़ी पर भी विशेष आयोजन किए गए। देहात इलाकों में भी भक्तों ने हनुमान मंदिरों में प्रसाद चढ़ाया, मन्नते मांगी। बजरंगबली की आराधना के ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ हनुमंतलला के दरबार में उमड़ती है।
मास के तीसरे मंगलवार के मद्देनजर भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बजरंगबली के पूजन-अर्चन के लिए उमड़ी। भोर से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बजरंगबली के पूजन-अर्चन के लिए जुटने लगी थी। चटख धूप व उमस भरी गर्मी के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था आराध्य की चौखट पर कतारबद्ध रही।
सरयू तट पर स्नान-दान के बाद श्रद्धालुओं की भीड़ प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ, कनक भवन, श्रीकालेराम आदि मंदिरों में जुटने लगी थी। प्रसिद्ध हनुमान गढ़ी मंदिर में भोर से दर्शन-पूजन के लिए दर्शनार्थियों की कतारें लगी रही।
ज्योतिषाचार्य स्वामी हरिदयाल मिश्र बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि भगवान श्रीराम से हनुमान जी की पहली मुलाकात ज्येष्ठ या जेठ के महीने में हुई थी। यही वजह है कि ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगलवार का बड़ा महत्व होता है।
स्वामी जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमान जी संकट हरने वाले देवता माने जाते है। संकट कैसा भी हो हनुमान जी उसे पल भर में दूर करने की क्षमता रखते हैं। लिहाजा हनुमान जी की पूर्ण समर्पण से भक्ति करने वाले के सभी कष्ट और संकट दूर हो जाते हैं।
शहर क्षेत्र में प्रसिद्ध नाका हनुमानगढ़ी में हनुमंतलला का पुष्पों से श्रंगार किया गया। हनुमंतलला को विशेष भोग लगाया गया। दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे। शाम को मंदिर परिसर में भजन संध्या का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
रिकाबगंज हनुमानगढ़ी पर भी हनुमंत लला का विशेष पूजन-अर्चन किया गया। उधर, जुड़वा शहर में विभिन्न समाजसेवी व अन्य संगठनों के ओर से स्टाल लगाकर लोगों को शरबत व प्रसाद वितरित करने की होड़ रही।