नवरात्र की अष्टमी पर रविवार को दुर्गा माता के आठवें स्वरूप महागौरी की पूजा की। ‘सर्वमंगल मांगल्यै शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्येत्रयंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते’ के स्वर पंडालों और सिद्धपीठों पर होते रहे।
कई पंडालों और मंदिरों में नवमी पर हवन भी हुए। भक्त हवन कुंडों में आहुतियां डालते रहे। शाम का धुंधलका होते ही पंडाल आकर्षक रोशनी से भर गये। महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बच्चियों की भीड़ मां के दर्शन और प्रसाद पाने के लिए जयकारे लगाती रही।
नगर और गांव तक इन दिनों धार्मिक आस्था चरम पर पहुंच गयी है। करीब 1350 देवी पंडालों और मंदिरों से चहुंओर मां के गीत गुंजित हो रहे हैं। मां को नारियल-चुनरी चढ़ाकर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना मां के भक्त करते रहे।
नाका चुंगी, नाका हनुमानगढ़ी, गणेशनगर मकबरा, चौक, कांग्रेस कार्यालय के सामने रिकाबगंज, बसंतवाटिका, कालीबाड़ी, दिल्ली दरवाजा, लाजपत नगर, रिकाबगंज हनुमान गढ़ी के सामने, रामजानकी मंदिर फतेहगंज, अंजनीपुरम रामलीला मैदान, जप्ती में दुर्गा मां की एक झलक पाने को लोग बेताब दिखे।
शहर के विभिन्न इलाकों व मोहल्लों में स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों के आस-पास रौनक परवान पर रही। भक्तों के आने मां के दर्शन और प्रसाद पाने का सिलसिला देर रात तक चला। पंडालों से दुर्गा मां के जयकारा लगता रहा भक्तों की भीड़ मां दुर्गा के दर्शन पाने का बेसब्री से इंतजार करती दिखा। पुलिस और समितियों की वाहिनी सुरक्षा और यातायात व्यवस्था कायम रखने के लिए जूझती रही।