अयोध्या। रामनगरी की विरासत, पहचान से जुड़े लंबे समय से उपेक्षित चल रहे पौराणिक कुंडों के कायाकल्प की उम्मीद जगी है। सात पौराणिक कुंड के जीर्णोद्धार के लिए पहले ही 2.75 करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं।
अब तीन करोड़ से ऐतिहासिक, पौराणिक सूर्यकुंड का भी सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। नगर विधायक वेद गुप्ता द्वारा इसका प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है।
कुंड के पास वाटर ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जाएंगे जिससे कुंड में हमेशा पानी रहे। इसके अतिरिक्त आसपास उद्यान विकसित करने सहित अन्य कार्यों के जरिए सूर्यकुंड को भव्यता प्रदान करने की तैयारी है।
अयोध्या के दर्शननगर में स्थित सूर्यकुंड को लेकर मान्यता है कि यह कुंड अरोग्यता प्रदान करने वाला है। हर वर्ष यहां बड़ा मेला लगता है, प्रतिदिन सायंकाल में होने वाली महाआरती में भक्त उमड़ते हैं। अयोध्या में पौराणिक कुंडों व सागरों की लंबी शृंखलाएं धीरे-धीरे इतिहास बनती जा रही हैं।
कालांतर में महाराजा दर्शन सिंह ने इस तीर्थ के प्रभाव के कारण यहां दर्शननगर बसाया और सूर्यकुंड का जीर्णोद्धार कराया। यहां पर हर वर्ष भादौ मास में शुक्ल पक्ष के पहले रविवार को मेला समारोह के साथ होता है।
आरोग्यता प्रदान में यह तीर्थ आज भी आदर्श स्वरूप है। यहां पर विधिपूर्वक स्नान एवं दान करने से समस्त पापों का नाश तथा सूर्यलोक की प्राप्ति होती है। पिछले दो वर्षों से नई सीख संस्था द्वारा मां सरयू की सायंकालीन आरती का भी क्रम शुरू किया गया है।
संस्था के संरक्षक सत्यदेव मिश्र ने बताया कि सायंकालीन आरती में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ते हैं। सूर्यकुंड परिसर में स्थित सूर्यमंदिर में दर्शन-पूजन के लिए लोगों का तांता लगा रहता है।