अयोध्या। राममंदिर निर्माण के लिए रामजन्मभूमि परिसर में नींव खोदाई का दो तिहाई कार्य पूरा हो चुका है। मार्च के अंत तक खोदाई का काम पूरा कर एक अप्रैल से नींव की भराई का कार्य शुरू होने की पूरी संभावना है।
नींव का निर्माण पारंपरिक शैली में होगा। इंजीनियरों ने नींव की डिजाइन व इसकी भराई का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है। नींव खोदाई का कार्य पूरा होने के बाद एनजीआरआई हैदराबाद के इंजीनियरों की टीम मिट्टी के लोड की क्षमता की फिर जांच करेगी।
श्रीराम का मंदिर पांच एकड़ में निर्मित होना है। मंदिर का पूरा परिसर अब तक 70 एकड़ में सीमित था, अब इसे करीब 107 एकड़ तक विस्तारित किया जाएगा।
रामलला के मंदिर में कहीं कोई तकनीकी खामी न रह जाए इसलिए श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट प्रत्येक बारीकियों का गहनता से अध्ययन करते हुए आगे बढ़ रहा है। नींव की डिजाइन व इसकी भराई का ब्लूप्रिंट तैयार है।
उम्मीद है कि एक अप्रैल से नींव भराई का कार्य शुरू हो जाएगा। नींव का निर्माण पारंपरिक शैली में होगा। इस समय नींव की तैयार डिजाइन के अनुरूप ही खोदाई का करीब 80 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया गया है।
नींव की खोदाई पूरी हो जाएगी तो दोबारा मिट्टी के लोड की क्षमता आंकी जाएगी। एलएंडटी और एनजीआरआई के इंजीनियरों की टीम यह देखेगी कि नींव खोदाई में जो प्राकृतिक मिट्टी मिली है वह कितनी क्षमता का भार सह सकेगी।
खोदाई के पहले भी मिट्टी के लोड की टेस्टिंग की गई थी। इसी आधार पर नींव की गहराई तय हुई थी। खोदाई के बाद विशेषज्ञों की टीम एक बार फिर से परिसर में आएगी। पिलर्स के सहारे क्षैतिज व ऊर्ध्वाधर लोड की क्षमता जांची जाएगी।
यह कार्य नींव की निचली सतह पर ही होगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर नींव भराई का काम शुरू होगा। राममंदिर के ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र बताते हैं कि खोदाई का दो तिहाई कार्य पूरा हो चुका है।
इंजीनियरों ने नींव की डिजाइन भी फाइनल कर ली है। अप्रैल से नींव भराई का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा। फील्ड मैटेरियल भी तय कर लिया गया है।
देश के नामी एजेंसियों ने महीनों के अध्ययन के बाद नींव के मैटेरियल की टेस्टिंग पूरी कर ली है। एलएंडटी, टाटा कंसल्टेंसी, आईआईटी चेन्नई सहित एनजीआरआई हैदराबाद के इंजीनियरों की टीम ने फिल्ड मैटेरियल तय कर लिया है।
यह मैटेरियल कई स्तर की टेस्टिंग के बाद तय किया गया। नींव भराई के लिए इंजीनियर्ड फिल्ड मैटेरियल का प्रयोग होगा। इसे पत्थर के साथ सीमेंट, मौरंग व माइक्रो सिलिका सहित अन्य पदार्थ से तैयार किया जाएगा। एक-एक लेयर भर कर इसे जमीन की सतह तक लाया जाएगा। इसके बाद ऊपरी हिस्से का कार्य शुरू हो जाएगा।