आस्था के पथ पर मंगलवार भोर में निकले श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह दिखा। परिक्रमा पथ पर सिर नवाते ही मानों आस्था का समुद्र लहराने लगा। चौदहकोसी परिक्रमा मार्ग पर रामचरित मानस की चौपाइयों की गूंज के साथ जयश्रीराम, राम-राम और सीताराम के स्वर ध्वनित हो रहे थे।
गगनभेदी जयघोष की सामूहिक स्वरों से चौहदकोसी परिक्रमा पथ गुंजायमान रहा। सुबह करीब 10 बजे अयोध्या-फैजाबाद मानव-श्रृंखला में बंध सी गई। ऐसा लगा जैसे कि दोनों नगरों को भक्तों की माला पहना दी गई हो।
रामनगरी की तीन परिक्रमाएं सदियों से आस्था का केंद्र रही हैं। इसमें सांस्कृतिक परिधि की 84 कोसी परिक्रमा, आध्यात्मिक परिधि की 14 कोसी परिक्रमा और धार्मिक परिधि की पंचकोसी परिक्रमा शामिल है।
मंगलवार की सुबह सात बजकर 32 मिनट पर परिक्रमा का मुहूर्त था लेकिन भक्तों ने तीन बजे ही शुरू कर दी। सुबह के सात बजते-बजते परिक्रमा शबाब पर आ गया। श्रद्धालुओं ने परिक्रमा पथ पर अपनी-अपनी सुविधा के अनुसार पहले से निश्चित किए गए स्थान से परिक्रमा के लिए कदम बढ़ाया।
अयोध्या, दर्शननगर भीखापुर, देवकाली, जनौरा, नाका हनुमानगढ़ी, मोदहा, सिविल लाइंस स्थित हनुमान मंदिर, सआदतगंज, अफीम कोठी आदि स्थानों से श्रद्धालुओं ने पूरे भक्ति की रौ में परिक्रमा करनी शुरू कर दी। श्रद्धालुओं की सेवा के लिए जगह-जगह सेवा शिविर भी लगे हुए थे।
जलपान से लेकर चिकित्सा के पूरे इंतजाम परिक्रमा पथ पर खूब दिखे। आस्था के पथ पर चल रहे श्रद्धालुओं की सेवा करने के लिए भी हजारों हाथ उठे हुए मिले। दर्द निरोधक दवाएं और मलहम हाथों में लिए सेवा शिविरों में लोग खड़े थे।