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क्लास रूम भी नहीं बता पाए दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री

Thu, 11 Jun 2015 12:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/फैजाबाद
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फर्जी डिग्री मामले में गिरफ्तार दिल्ली के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर को पुलिस अभिरक्षा में बुधवार को फैजाबाद लाया गया। दिल्ली पुलिस की पांच सदस्यीय जांच टीम बुधवार दोपहर करीब पौने 12 बजे फरक्का एक्सप्रेस से रेलवे स्टेशन पहुंची।
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लगभग 15 मिनट के अंतराल पर पुलिस टीम पूर्व मंत्री को लेकर डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय पहुंच गई। यहां कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के साथ दिल्ली पुलिस ने करीब पौने पांच घंटे तक गहन जांच की। इसके बाद पुलिस ने देर शाम साकेत महाविद्यालय में भी घंटों जांच की।

जहां टीम के पूछने पर वह अपना क्लास रूम भी नहीं बता पाए। टीम को चकमा देने के लिए वो जिस क्लास रूम में ले गए। वहां कला विषय की कक्षाएं चलती है। दिल्ली की केजरीवाल सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर ने तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, बिहार से एलएलबी करने के लिए अवध विश्वविद्यालय से संबद्ध साकेत महाविद्यालय की बीएससी डिग्री लगाई थी।
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वर्ष 1988 की द्वितीय वर्ष बीएससी की उक्त डिग्री अनुक्रमांक-31331 पर जारी हुई है। जिसे गाजियाबाद के शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार की शिकायत पर हुई जांच में विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसी साल जनवरी में फर्जी करार दिया था। बीएससी व एलएलबी की दोनों डिग्री फर्जी मिलने के बाद मंगलवार को दिल्ली सरकार के कानून मंत्री रहे जितेंद्र सिंह तोमर गिरफ्तार कर बुधवार को रिमांड पर दिल्ली पुलिस की जांच टीम एसीपी आरके पुरम सोमेंद्र पाल त्यागी के नेतृत्व में यहां लेकर पहुंची।

टीम फरक्का एक्सप्रेस से करीब 11.44 बजे रेलवे स्टेशन पहुंची। यहां से पूर्व मंत्री को तुरंत ही गाड़ी में बैठा लिया गया। करीब 12.07 बजे पुलिस की टीम पूर्व मंत्री को लेकर अवध विश्वविद्यालय पहुंच गई। यहां उन्हें प्रशासनिक भवन स्थित कुलसचिव कार्यालय में दाखिल कर दिया गया।

इसके बाद लगभग पांच बजे तक जांच टीम के अधिकारी रिकार्ड खंगालते रहे और विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. साहबलाल मौर्य व परीक्षा नियंत्रक एएम अंसारी से पूछताछ होती रही। सूत्र बताते हैं कि पुलिस टीम के अधिकारियों ने विश्वविद्यालय से तत्समय डिग्री लेने वाले कुछ पूर्व छात्रों व कर्मचारियों को भी बुलाकर पूछताछ की। वर्ष 1987 से 1988 के बीच के सारे रिकार्ड तलाशे गए।

 सारणीयन पंजिका की जांच कराई गई। जांच टीम ने दस्तावेजों से तस्दीक की कि पूर्व मंत्री का विश्वविद्यालय में नामांकन हुआ था कि नहीं? कुछ पुराने कर्मचारियों व शिक्षकों से वार्ता कर खंगाला गया कि पूर्व मंत्री ने विश्वविद्यालय से संबद्ध साकेत महाविद्यालय में कभी प्रवेश लिया रहा हो।

बताया जा रहा कि जांच में दिल्ली पुलिस को कुछ पूर्व कर्मचारियों की संलिप्तता मिली है। पुलिस को डिग्री पर दर्ज तत्कालीन कुलपति रामविलास मिश्र के हस्ताक्षर फर्जी पाए गए हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री को डिग्री दिलाने में कुछ पुराने कर्मचारियों की भूमिका भी पाई गई है। लगभग पांच घंटे विश्वविद्यालय में जांच करने के बाद पुलिस टीम पूर्व मंत्री को लेकर साकेत महाविद्यालय अयोध्या पहुंची।

वहां भी काफी देर तक पूर्व मंत्री से पूछताछ होती रही और महाविद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों से पहचान कराई गई। देर शाम टीम ने तोमर से उनकी कक्षा के बारे में पूछा, कि उनकी क्लास कहां थी। इस पर तोमर जांच टीम को चकमा देने के लिए महाविद्यालय परिसर के पीछे बने कक्षा कक्ष में ले गए। उन्होंने जो अपना क्लास रूम बताया वहां शिक्षकों के अनुसार कला संकाय की कक्षाएं चलती हैं। पुलिस की जांच टीम में एसीपी एसपी त्यागी के अलावा एसएचओ हौजखास व विवेचक केपी सांगवान, एसएचओ सरोजनीनगर वीकेपीएस यादव, साकेत थाने के इंस्पेक्टर हीरालाल व एसटीएफ के एक इंस्पेक्टर शामिल रहे।
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