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बदहाल पड़ी सांस्कृतिक विरासतों का होगा संरक्षण

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अयोध्या का गुलाबबाड़ी। - फोटो : FAIZABAD
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केस-1
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मणिपर्वत की पहचान मिटने का खतरा
मणिपर्वत अयोध्या का उत्तुंग शिखर है और इतिहास का जीता जागता प्रमाण भी, लेकिन बदलते समय के साथ संरक्षण को लेकर हो रही उपेक्षा से इसकी पहचान मिटने का खतरा उत्पन्न हो गया है। मणिपर्वत पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने चेतावनी का बोर्ड लगा रखा है। हर साल एक पखवारे तक चलने वाले सावन मेले की शुरूआत इसी मणिपर्वत पर झूलनोत्सव के साथ होती है। अयोध्या के सभी मंदिरों के विग्रह यहां आते हैं। पेड़ों की डालियों पर पड़े झूले पर झ्भगवान के विग्रह को झूला झुलाया जाता है यहीं से ऐतिहासिक सावन मेले का शुभारंभ होता है।
सीन-2
उपेक्षित नवाबों के काल की गुलाबबाड़ी
शहर के अंदर अवध के नवाब शुजाउद्दौला के स्मारक में बना गुलाबबाड़ी रखरखाव के अभाव में उपेक्षित है। गुलाब बाड़ी का मतलब है गुलाब का बगीचा। कभी गुलाब की वैराइटी के लिए प्रसिद्ध गुलाबबाड़ी की में अब गुलाब की चंद किस्में रह गई हैं। गुलाबबाड़ी परिसर में एक इमामबाड़ा या इमाम की कब्र भी स्थित है जो स्वंय में एक आकर्षण है। वर्तमान में परिसर के चारों तरफ अतिक्रमण के चलते गुलाबबाड़ी की सूरत बिगड़ गई है। यदि इसका उचित संरक्षण एवं रखरखाव किया जाए तो शहर की शान बन सकती है।
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अयोध्या। रामनगरी की बदहाल पड़ी सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण के लिए शासन ने नई कार्ययोजना तैयार की है। संस्कृति विभाग ने सूबे के हर जिले में समिति गठित कर दो माह के भीतर सांस्कृतिक विरासतों को चिन्हित कर उनकी सूची मांगी है ताकि उनकी संरक्षण किया जा सके।
रामनगरी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत की प्रधान केंद्र हैं। रामनगरी में मणिपर्वत, गुलाबबाड़ी, बहूबेगम मकबरा जैसी ऐतिहासिक विरासतें आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं तो वहीं दर्जनों ऐतिहासिक सागर व कुंड बदहाल हैं। इस योजना से अयोध्या में बदहाल पड़ी सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण एवं संवर्धन की उम्मीद जगी है।
विगत दिनों हुई समीक्षा बैठक में राज्यमंत्री संस्कृति, पर्यटन एवं धर्मार्थ कार्य डॉ. नीलकंठ तिवारी ने प्रदेश के सभी जिलों में सांस्कृतिक सर्वेक्षण एवं दस्तावेजीकरण किए जाने के निर्देश दिए हैं।
इसी निर्देश के अनुपालन में अब बदहाल पड़ी सांस्कृतिक विरासतों के संरक्षण की संरचना तैयार की जा रही है। शहर की सांस्कृतिक विरासतों को चिह्नित करने का काम शुरू हो चुका है।
रामनगरी में करीब दो दर्जन से अधिक कुंड बदहाल पड़ हैं, हर कुंड की अपनी-अपनी कोई न कोई मान्यताएं हैं। अधिकांश कुंड रामायण कालीन माने जाते हैं लेकिन उचित संरक्षण के अभाव में आज ये बदहाल हो गए हैं। कई कुंडों का अस्तित्व तो भू-माफियाओं ने मिटा दिया।
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सप्तसागर कुंड, क्षीरसागर कुंड, उर्वशी कुंड आदि का अस्तित्व समाप्त होने को है। इसी तरह शहर में स्थिति नवाबों के काल की इमारतें भी बदहाल पड़ी हैं। इस योजना से इनके संरक्षण एवं संवर्धन की उम्मीद प्रबल हुई है।
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