अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज गंजा तक जाने वाले रास्ते का मामला उलझ गया है। अब सीआरपीएफ के जवानों ने निर्माण सामग्री लेकर जाने वाले ट्रकों का आवागमन बाधित कर दिया है।
इससे 31 अक्तूबर तक काम पूरा होने की उम्मीद धूमिल हो रही है। समस्या को लेकर कार्यदायी संस्था के महाप्रबंधक व इकाई प्रबंधक ने उप जिलाधिकारी व जिलाधिकारी से मामले की शिकायत की है।
मुख्यमंत्री की शीर्ष प्राथमिकता में शामिल निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज गंजा की राह से रोड़े दूर नहीं हो रहे हैं। आननफानन में प्रथम बैच के संचालन के लिए मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूर्ण कर बिल्डिंग हैंडओवर कर दी गई और शेष निर्माण कार्य संचालित है।
शासन की ओर से कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम लिमिटेड को 31 अक्तूबर तक गंजा परिसर का व मार्च 2020 तक दर्शननगर स्थित चिकित्सालय परिसर निर्माण कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन यहां व्याप्त तमाम दुश्वारियों की वजह से तय डेडलाइन तक निर्माण कार्य पूर्ण होना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है।
सीआरपीएफ ने मेडिकल कॉलेज के लिए निर्माण सामग्री लेकर जाने वाले ट्रकों का आवागमन भी रोक दिया है, जिससे निर्माण कार्य समय पर पूरा होना आसान प्रतीत नहीं हो रहा है।
कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के महाप्रबंधक यतेंद्र कुमार ने डीएम को चार अक्तूबर को दिए पत्र में कहा है कि परियोजना के प्रारंभ से निर्माण सामग्रियों को ट्रांसपोर्ट वाहनों के माध्यम से गंजा परिसर कार्यस्थल पर पहुंचाया जाता रहा है लेकिन वर्तमान में सीआरपीएफ कैंप के कार्मिकों द्वारा वाहनों को रोका जा रहा है, जिससे निर्माण कार्य बाधित हो रहा है व निर्माण कार्य की डेडलाइन भी प्रभावित हो रही है।
मेडिकल कॉलेज बना, रास्ते का इंतजाम नहीं
मेडिकल कॉलेज की इमारत तो खड़ी हो गई, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए मुख्य मार्ग का इंतजाम अभी नहीं हो सका है। जबकि इसके लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा बजट पहले से ही आवंटित है। चांदपुर के निकट से मेडिकल कॉलेज के लिए गई सड़क पर सीआरपीएफ का कैंप है। सीआरपीएफ के लोगों ने इसे अपनी जमीन बताकर मुख्य मार्ग निर्माण होने से रोक दिया तो मामला शासन तक पहुंचा। महत्वपूर्ण कार्य होने के कारण शासन में भी दिलचस्पी ली गई और सीआरपीएफ के अधिकारियों की शासन स्तर पर वार्ता हुई।
अन्यत्र जमीन देने के प्रस्ताव पर नहीं बनी बात
जिला प्रशासन के साथ भी हुई बैठक में सीआरपीएफ को आवंटित जमीन के एवज में अन्यत्र जमीन देने का प्रस्ताव रखा गया, लेकिन बात नहीं बन सकी। इधर, अगस्त से सौ छात्रों का प्रथम बैच संचालित हुआ, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं मिला। हवाई पट्टी के बगल से मेडिकल कॉलेज के लिए गया रास्ता बदहाल है। मार्ग पर जगह-जगह जलभराव की समस्या से छात्र-छात्राओं सहित प्रोफेसर व प्राचार्य तक को जूझना पड़ रहा है।
दो घंटे खुल रहा रास्ता, आने वाले ट्रक लौट नहीं पाते
इकाई प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि सीआरपीएफ द्वारा सुबह सात से नौ बजे तक का ही टाइम ट्रकों के आवागमन के लिए दिया गया है। इससे विभिन्न कारणों से नौ बजे के बाद पहुंचने वाली ट्रकों को अगले दिन सात बजे तक खड़ा होना पड़ता है। साथ ही जो ट्रक आ रहे हैं वे माल उतारने के बाद फंस जाते हैं। उधर, समय पर निर्माण सामग्री न मिलने के कारण समय पर कार्य नहीं हो पाता है। इस तरह निर्माण कार्य भी बाधित हो रहा है।
मार्ग की समस्या से जूझ रहा मेडिकल कॉलेज: प्राचार्य
मुख्य मार्ग की समस्या से मेडिकल कॉलेज जूझ रहा है। कई बार समस्या से शासन को अवगत कराया गया है। इसको लेकर कई बार बैठकें भी हो चुकी हैं। शीघ्र ही समस्या का निस्तारण होने की समस्या है।
डॉ. विजय कुमार, प्रिंसिपल, मेडिकल कॉलेज