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बारिश में डूब रही किसानों की मेहनत

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अयोध्या। इस सप्ताह हुई बेमौसम बरसात से किसानों का हिसाब बिगड़ रहा है। यह बरसात जहां एक ओर गेहूं की फसल के संजीवनी साबित हो रही है, तो दूसरी ओर दलहनी व तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। इसको लेकर किसानों में कहीं खुशी तो कहीं गम का माहौल है।
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जिले में इस बार किसानों ने गेहूं के साथ ही जौ, चना, मटर, सरसों, आलू व तोरिया का रिकार्ड क्षेत्रफल में बुवाई किया है। अभी से समयबद्ध तरीके से रखरखाव करके रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद भी लगाई थी। लेकिन एकाएक हुई बारिश से कुछ किसानों का हिसाब गड़बड़ाता नजर आ रहा है। गतवर्ष 1,06,251 हेक्टेयर में गेहूं की बोआई की गई थी, जिससे 4,12,905 एमटी उत्पादन किया गया था।
इस बार किसानों ने 1,06,838 हेक्टेयर में बोआई किया है, जिससे करीब 4,25,113 एमटी उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक स्थिति के अनुसार इस लक्ष्य की पूर्ति भी संभावित है। अचानक हुई बरसात से गेहूं की फसल को खासा लाभ मिलने की आशंका है।
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इसके अलावा इस बार किसानों ने गतवर्ष की अपेक्षा अधिक क्षेत्रफल को आच्छादित करते हुए 1662 हेक्टेयर में चना, 238 हेक्टेयर में जौ, 2529 हेक्टेयर में मटर, 7026 हेक्टेयर में मसूर, 3791 हेक्टेयर में सरसों व 5038 हेक्टेयर में तोरिया की बोआई किया है। जिससे कृषि विभाग ने क्रमश: 2854, 747, 4092, 7319, 3226 मीट्रिक टन उत्पादन करने का अनुमान लगा रहा है।
लेकिन मौसम इन फसलों के बेहतर उत्पादन के हिसाब से अनुकूल नहीं प्रतीत हो रहा है। जनवरी के प्रथम सप्ताह में भी दो दिन में हुई मध्यम वर्षा व पिछले दो दिन से हो रही बरसात से किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरने की संभावना है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बारिश से गेहूं को फायदा होगा। जिला कृषि अधिकारी बीके सिंह ने बताया कि अभी तक जितनी बरसात हुई है, इसके बाद यदि मौसम साफ हुआ और धूप खिली तो कीट रोगों से हर प्रकार की फसलों को फायदा होगा। लेकिन यदि और बारिश हुई तो दलहनी, तिलहनी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। खासकर जो किसान हाल ही में सिंचाई किए हैं, उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत है।
हर बार खाली रह जाते हैं कोल्ड स्टोरेज
जिले में आलू के भंडारण के लिए जिले में नौ कोल्ड स्टोरज भी स्थापित हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 60 हजार मीट्रिक टन है। अधीक्षक राजकीय उद्यान डीपी सिंह ने बताया कि अधिकांश किसान मार्च तक स्थानीय बाजार व मंडी आदि में जाकर व अन्य स्रोतों से आलू का विक्रय कर लेते हैं। इसलिए ये कोल्ड स्टोरेज अधिकांशत: खाली ही रह जाते हैं और भंडारण को लेकर खास समस्याएं सामने नहीं आती हैं।
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