चार साल के मासूम की नरबलि के प्रयास मामले में 16 साल बाद आरोपी महिला ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश चिंताराम ने उसकी ओर से दी गई जमानत अर्जी खारिज करते हुए जेल भेज दिया। मामला बीकापुर कोतवाली के गांव पुहुंपी का है।
वादी के अधिवक्ता गया प्रसाद तिवारी ने बताया कि घटना 24 जून 1999 की है। वादी सूर्यभान का भतीजा चार वर्षीय रोशन आम तोड़ने के लिए निकला था। वह नहीं लौटा तो काफी तलाश हुई। बाद में वह गंभीर रूप से घायलावस्था में गांव के समीप झाड़ी में मिला था।
उसके गले पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। इसकी रिपोर्ट रोशन के चाचा ने अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखाई थी। विवेचना में गांव की कुमारी मुन्नू उर्फ सुनीता को पुलिस ने गिरफ्तार किया फिर मासूम व उसके पिता सुदामा, चाचा सूर्यभान के बयान पर भी मुख्य आरोपी नीलम को अभियुक्त नहीं बनाया।
विवेचना में पता चला कि नीलम के चार लड़कियां थीं। किसी तांत्रिक ने लड़के की बलि देने पर पुत्र पैदा होने की बात बताई थी। उसी के चक्कर में रोशन के ऊपर जानलेवा हमला किया गया। आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल हुआ। गवाहों के बयान के बाद कोर्ट में नीलम को आरोपी बनाने की अर्जी दी गई।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने नीलम को जानलेवा हमला के आरोप के तहत विचारण के लिए तलब किया। इसके खिलाफ रिवीजन जिला जज और हाईकोर्ट में हुआ। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए नीलम को पंद्रह दिन के अंदर कोर्ट में सरेंडर करने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में नीलम ने किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान न्यायाधीश के समक्ष समर्पण किया।