पूर्व तहसीलदार न्यायिक व उनके पेशकार ने कोर्ट में झूठी गवाही दे दी। इसका लाभ आरोपी को मिला और कोर्ट ने तहसीलदार की कोर्ट में पत्रावली का पन्ना फाड़ डालने के आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
लेकिन कोर्ट में झूठी गवाही किन परिस्थितियों में दी गई इसकी जांच के लिए सीजेएम कोर्ट ने निर्णय की प्रति जिलाधिकारी को भेजने व जांच आख्या 15 दिन के अंदर कोर्ट में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
शहर के बछड़ा सुल्तानपुर का दाखिल खारिज का मुकदमा रेखा चौधरी बनाम तारादेवी तहसीलदार न्यायिक कृष्ण कुमार पांडेय की अदालत में विचाराधीन था। इसमें साक्ष्य के लिए पेशी 23 मार्च 2013 को थी।
इस तारीख को सदर तहसील के सरेठी गांव निवासी राम चंदर ने बयान दर्ज कराया। रामचंदर ने अपनी जिरह से इस बिना पर मना कर दिया कि उसके अधिवक्ता नहीं हैं। इस पर पेशकार ने जिरह जारी करते हुए पत्रावली पर हस्ताक्षर करने के लिए उसे दिया तो उसने बयान वाला पन्ना फाड़ डाला।
इसकी रिपोर्ट तत्कालीन तहसीलदार न्यायिक के पेशकार पवन कुमार श्रीवास्तव ने कोतवाली नगर में लिखाई थी। तहसीलदार और पवन ने दारोगा को दिए गए बयान में रामचंदर द्वारा बयान का पन्ना फाड़ लेने की बात भी बताई, लेकिन दोनों लोग अदालत में दरोगा को दिए गए बयान से मुकर गए जिससे कोर्ट ने रामचंदर को दोषमुक्त कर दिया।
लेकिन झूठी गवाही देने के मामले में निर्णय की एक प्रति जिलाधिकारी को इस आशय के साथ प्रेषित की है कि वह मुकदमें के वादी पवन कुमार व तहसीलदार न्यायिक कृष्ण कुमार पांडेय ने किन परिस्थितियों में न्यायालय में मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत किया। इस संबंध में जांच आख्या 15 दिन के अंदर कोर्ट में प्रेषित करना सुनिश्चित करें।