सीएचसी में रविवार की रात प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने बरामदे के फर्श पर ही बच्ची को जन्म दिया लेकिन नवजात की कुछ समय में ही मौत हो गई। प्रसव पीड़िता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था लेकिन 45 मिनट बीत जाने के बाद भी एंबुलेंस नहीं पहुंची। इसी दौरान पूरा वाक्या घटा। नवजात की मौत के लिए परिवारीजन सीएचसी प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
कोतवाली क्षेत्र के उमर्निपिपरी निवासी सूबेदार के घर रह रही उनकी भांजी निशा पत्नी रामभवन को रविवार की शाम करीब पांच बजे प्रसव के लिए सीएचसी में भर्ती कराया गया। शाम सात बजे एएनएम ने खून की कमी बताकर प्रसव पीड़िता को जिला अस्पताल ले जाने को कहा।
एएनएम प्रभावती ने बताया की प्रसूता शारीरिक रूप से काफी कमजोर व एनीमिक थी, जिसके चलते सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया था। वार्ड के बाहर प्रसूता को बरामदे की फर्श पर लिटा परिवारीजन एंबुलेंस का इंतजार करने लगे।
पीड़िता के मामा सूबेदार ने बताया कि डायल-102 पर फोन किया गया लेकिन एंबुलेंस करीब लगभग 45 मिनट बाद आई। इसी दौरान भांजी ने बच्ची को जन्म दिया। यह देख स्वास्थ्य कर्मियों के हाथ पांव फूल गए और फौरन उसे वार्ड में ले जाया गया।
नवजात बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर बच्ची को डॉक्टर ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया लेकिन जिला अस्पताल जाते समय रास्ते में ही नवजात की मौत हो गई। सीएचसी अधीक्षक फिरोज अहमद ने बताया कि नवजात बच्ची की धड़कन काफी धीमी चल रही थी। बाल रोग के डॉक्टर न होने के चलते जिला अस्पताल रेफर किया गया था जबकि परिवारीजन बच्ची की मौत के लिए सीएचसी प्रशासन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।